वसंत पंचमी 2018 : जानिए कब और कैसे करें सरस्वती की पूजा

January 16, 20181min5660

भारतीय पंचांग में छह ऋतुएं होती हैं. इनमें से वसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है. वसंत फूलों के खिलने और नई फसल के आने का त्योहार है. इसी की खुशी में वसंत ऋतु के पांचवें दिन उत्सव मनाया जाता है.  मां सरस्वती की पूजन और आराधना के इस पवित्र दिन का अत्यंत महत्व है। इस दिन विद्या, ज्ञान और बुद्धि की अधिष्ठात्री मां शारदा विशेष आशीष प्रदान करती है.

वर्ष 2018 में यह पर्व 22 जनवरी को आ रहा है. दरअसल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है. ज्ञान,विद्या, बुद्धि व संगीत की देवी सरस्वती का आविर्भाव इसी दिन हुआ था. इसलिए यह तिथि वागीश्वरी जयंती व श्री पंचमी के नाम से भी प्रसिद्ध है। ऋग्वेद में सरस्वती देवी के असीम प्रभाव व महिमा का वर्णन किया गया है। इस दिन को हर नए काम की शुरुआत के लिए यह बहुत ही मंगलकारी माना गया है.इस दिन विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा कर गरीब बच्चों में कलम व पुस्तकों का दान करते है. संगीत से जुड़े व्यक्ति अपने साज पर तिलक लगा कर मां की आराधना कर बांसुरी भेंट करते है .

ऐसे करें वसंत पंचमी पूजा

सुबह सवेरे स्नानादि कर पीले, नारंगी, गुलाबी या श्वेत वस्त्र धारण करें. मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें. मंगल कलश स्थापित कर भगवान गणेश व नवग्रह की विधिवत पूजा करें। फिर मां सरस्वती की पूजा करे. मां की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन व स्नान कराएं। फिर मां शार दा का फूलों से का श्रृंगार करें। मां श्वेत वस्त्र धारण करती हैं इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं. प्रसाद के रुप में खीर अथवा दुध से बनी मिठाईयां चढ़ा सकते हैं. सफ़ेद फूल अर्पण करें.

वसंत पंचमी की पौराणिक कथा

ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि की रचना की तब इसकी नीरसता को देखकर वे अप्रसन्न हुए. फिर उन्होंनें अपने कमंडल से जल छिटका जिससे चारों तरफ धरा हरी-भरी हो गई. रंगबिरंगे फूल खिल गए . नदिया कलकल छलछल बहने लगी, संगीत की स्वर लहरियों से वातावरण सुमधुर हो गया तभी श्वेत परिधानों में अत्यं‍त सुंदर देवी प्रकट हुई. यह विद्या, बुद्धि, ज्ञान व संगीत की देवी सरस्वती थीं. ब्रह्मा जी ने उन्हें आदेश दिया कि इस संसार में ज्ञान व संगीत का संचार कर जगत का उद्धार करो. देवी ने वीणा के तार झंकृत किए जिससे समस्त प्राणी बोलने लगे, नदियां प्रवाहमयी होकर बहने लगी, हवा ने भी सन्नाटे को चीर कर मीठा संगीत पैदा किया. वह दिन वसंत पंचमी का था तब से ही बुद्धि व संगीत की देवी के रुप में मां सरस्वती पूजी जाने लगी.
यह सुनिश्चित हुआ कि माघ के शुक्ल पक्ष की पंचमी को समस्त विश्व तुम्हारी विद्या व ज्ञान की देवी के रुप में पूजा करेगा। भगवान श्री कृष्ण ने सबसे पहले देवी सरस्वती की पूजा की तब से लेकर निरंतर वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा लोग करते आ रहे हैं.

वसंत पंचमी – 22 जनवरी 2018

पंचमी तिथि का आरंभ – 15:33 बजे से (21 जनवरी 2018)

पंचमी तिथि समाप्त – 16:24 बजे (22 जनवरी 2018)

पूजा का शुभ और सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

07:17 से 12:32 बजे तक

 





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