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March 26, 20193min860

इस बार चैत्र नवरात्रि पूरे 9 दिन की रहेगी, यानी तिथियों का क्षय इस बार नहीं होगा। साथ ही इस नवरात्रि में अनेक शुभ योग भी बन रहे हैं। नवरात्रि में कार्यसिद्धि, अर्थसिद्धि, पदप्रतिष्ठा के लिए देवी मंदिरों में विशेष अनुष्ठान कराए जाएंगे।

हम आपको बता दें कि  6 अप्रैल से शुरू होने वाली चैत्र नवरात्रि में पांच सर्वार्थ सिद्धि, दो रवि योग और रवि पुष्य योग का संयोग बन रहा है। श्रीमद् देवी भागवत व देवी ग्रंथों के अनुसार इस तरह के संयोग कम ही बनते हैं। इसलिए यह नवरात्रि देवी साधकों के लिए खास रहेगी। नवरात्रि का समापन 14 अप्रैल को होगा।

2 दिन मनाई जाएगी श्रीराम नवमी ( Sri rama navami 2019)

श्रीराम नवमी 13 अप्रैल को रहेगी। इस दिन सुबह 11.48 बजे तक अष्टमी है और इसके बाद नवमी शुरू हो जाएगी। इस मत में मध्याह्न व्यापिनी नवमी को श्रीराम नवमी मानते हैं। जबकि वैष्णव मत में उदयकाल की तिथि मानी जाती है। 14 अप्रैल को सुबह 9.27 बजे तक नवमी होने से इस मत के लोग 14 अप्रैल को नवमी मनाएंगे। तिथि बजकर मिनट तक पर है 

घटस्थापना समय ( ghatasthapana time)

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना 6 मार्च 2019 को है. प्रतिपदा तिथि 5 अप्रैल 2019 को 2 बजकर 20 मिनट

पर प्रारम्भ होगी .  प्रतिपदा तिथि का समापन 6 अप्रैल 2019 को 3 बजकर 23 मिनट पर होगा.

घटस्थापना मुहूर्त (ghatasthapana muhurat)

05:49 से 09:57  तक (Ghatasthapana Muhurta = 05:49 to 09:57)

अवधि = 4 घंटे 8 मिनट (Duration = 4 Hours 8 Mins)

नवरात्रि में बनेगें अनेक शुभ योग

किस दिन बनेगा कौनसा शुभ योग? आइये जानते हैं ..

7

अप्रैलद्वितीया के साथ सर्वार्थ सिद्धि (शुभ) बन रहा है.

8 अप्रैलतृतीया के साथ रवि योग (कार्य सिद्धि) बन रहा है.

9 अप्रैलचतुर्थी के साथ सर्वार्थ सिद्धि (भूमि, भवन खरीदी) बन रहा है.

10 अप्रैलपंचमी के साथ सर्वार्थ सिद्धि (लक्ष्मी पंचमी)  बन रहा है.

11 अप्रैलछठ के साथ रवि योग (संतान सुरक्षा) बन रहा है.

12 अप्रैलसप्तमी के साथ सर्वार्थ सिद्धि(नए संबंध चर्चा) बन रहा है.

13 अप्रैलअष्टमी पर कुलदेवी पूजन (स्मार्त मतानुसार नवमी) बन रहा है.

14 अप्रैलनवमी के साथ रवि पुष्य व सर्वार्थ सिद्धि (यानी वैष्णव मतानुसार सुबह 9.37 तक ही रहेगी नवमी)


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March 9, 20181min3540

देवी भागवत पुराण के अनुसार पूरे वर्ष में चार नवरात्र होते हैं। दो गुप्त, तीसरे शारदीय और चौथे चैत्र नवरात्र। अमूमन लोग गुप्त नवरात्र के बारे में कम ही जानते हैं। साल में दो बार होने वाले शारदीय और चैत्र नवरात्र के बारे में ज्यादातर लोगों की जानकारी होती है।चैत्र नवरात्र हवन पूजन और स्वास्थ्य के बहुत फायदेमंद होते हैं। इस समय चारों नवरात्र ऋतुओं के संधिकाल में होते हैं यानी इस समय मौसम में परिवर्तन होता है। इस कारण व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोरी महसूस करता है। मन को पहले की तरह दुरुस्त करने के लिए व्रत किए जाते हैं। जानिए चैत्र नवरात्र का महत्व और इससे जुड़ी अन्य बातें.

 

चैत्र नवरात्री का वैज्ञानिक आधार

हर नवरात्र के पीछे का एक वैज्ञानिक आधार है। पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा काल में एक साल की चार संधियां होती हैं। जिनमें से मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय बीमारियों के आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है।

ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं। अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए, शरीर को शुद्ध रखने के लिए, तन-मन को निर्मल रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम ‘नवरात्र’ है।

हालांकि शरीर को सुचारू रखने के लिए शारीर की सफाई या शुद्धि प्रतिदिन तो हम करते ही हैं किन्तु अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई करने के लिए हर 6 माह के अंतर से सफाई अभियान चलाया जाता है जिसमें सात्विक आहार के व्रत का पालन करने से शरीर की शुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों के सच्चरित्रता से मन शुद्ध होता है, क्योंकि स्वच्छ मन मंदिर में ही तो ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है.

ये भी पढ़ें : चैत्र नवरात्रि 18 मार्च से , जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और महत्व

ज्योतिषीय दृष्टि से महत्व

ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाले चैत्र नवरात्र में सूर्य का राशि परिवर्तन होता है। सूर्य इस दौरान मेष में प्रवेश करता है। चैत्र नवरात्र से नववर्ष के पंचांग की गणना शुरू होती है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने का असर सभी राशियों पर पड़ता है।

पृथ्वी पर आदिशक्ति

ऐसी मान्यता है कि नवरात्र के नौ दिन काफी शुभ होते हैं, इन दिनों में कोई भी शुभ कार्य बिना सोच-विचार के कर लेना चाहिए। इसका कारण यह है कि पूरी सृष्टि को अपनी माया से ढ़कने वाली आदिशक्ति इस समय पृथ्वी पर होती है।

हिंदू वर्ष की शुरुआत

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष शुरू होता है। तीसरे चैत्र नवरात्र को भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में पहला अवतार लेकर पृथ्वी की स्थापना की थी। इसके बाद भगवान विष्णु का भगवान राम के रूप में अवतार भी चैत्र नवरात्र में ही हुआ था। इसलिए इनका बहुत अधिक महत्व है।

इस बार चैत्र नवरात्र 18 मार्च से शुरू होंगे। पूजन की शुरुआत घट पूजन से की जाएगी। पूजन के लिए शुभ मुहूर्त 6 बजकर 17 मिनट से 07 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। 18 मार्च से शुरू होने वाले नवरात्र 26 मार्च को संपन्न होंगे.

Achary Rajesh Kumar rajpra.infocom@gmail.com



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