रामनवमी 2018 : जानिए पूजा के शुभ मुहूर्त और व्रत-पूजन विधि,

March 10, 20181min5840

चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन पड़ने नवमी को ही रामनवमी के रूप में मनाया जाता है, यह त्यौहार वैष्णव समुदाय में विशेषतौर पर मनाया जाता है, इस वर्ष 2018 में 25 मार्च को रामनवमी मनाई जाएगी.

राम नवमी 2018 तिथि – रविवार 25 मार्च

रामनवमी पूजामुहूर्त :

प्रात: 11:14:04 से दोपहर 13:41:03 तक

अवधि: 2 घंटे 26 मिनट

रामनवमी मध्याह्न समय: 12:27:33

नवमी तिथी शुरुआती: 25. मार्च. 2018 को 8 बजर 2 मिनट पर

नवमी तिथी समाप्ति = 26. मार्च. 2018 05:54 बजे

राम जन्म की ख़ुशी में लोग रामनवमी पर्व मनाते है। इस दिन कई लोग उपवास भी रखते हैं, भक्तगण रामायण का पाठ करते हैं। भक्त रामरक्षा स्त्रोत भी पढ़ते हैं और कई जगह भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया जाता है। लोग अपने घरों और मंदिरो में भगवान राम की मूर्ति को फूल-माला से सजाते हैं और स्थापित करते हैं। इस दिन लोग भगवान राम की मूर्ति को पालने में झुलाते हैं

पूजा सामग्री

पूजाघर में रामजी की तस्वीर या मूर्ति रखें, रामजी के लिए वस्त्र या दुपट्टा, राम नाम की किताब, चंदन, एक नारियल, रोली, मोली, चावल, सुपारी, कलश में साधारण पानी या गंगा जल, ताजी और धुली हुई आम की पत्तियां, तुलसी पत्ते, कमल के फूल, ताजा हरी घास, पान के पत्ते, लौंग, इलायची, कुमकुम ( सिंदूर ), गुलाल अगरबत्ती, दीप-धूप और माचिस, पेड़ा या लड्डू, एक आसन

श्रीराम की पूजा-अर्चना विधि

रामनवमी के दिन महिला को प्रातः काल सुबह उठना चाहिए, घर की साफ़-सफाई से घर को शुद्ध करना चाहिए। सबसे पहले स्नान इत्यादि करके पवित्र होकर पूजास्थल पर पूजन सामग्री के साथ बैठें। इसके बाद राम नवमी की पूजा करने के लिए श्रीराम के लिए अखंड ज्योत जलाएं, धूप-दीप को देवताओं के बाएं तरफ और अगरबत्ती को दाएं तरफ रखें। पूजा में तुलसी पत्ता और कमल का फूल अवश्य होना चाहिए।

साथ ही कलश और नारियल भी पूजाघर में रखें। खीर और फल-फूल को प्रसाद के रूप में तैयार करें। सभी लोगों के माथे पर तिलक लगाए, आसन बिछाकर कमर सीधी कर भगवान के आगे बैठें। घंटी और शंखनाद करें। राम पूजन शुरू करने से पहले भगवान श्रीराम की आरती करें इसके बाद पुष्पांजलि अर्पित करके क्षमा प्रार्थना करे। उसके बाद श्रीराम नवमी की पूजा षोडशोपचार करें। रामनवमी की व्रत कथा सुनें और घर के प्रांगण में तुलसी मंडप के समक्ष ध्वजा, पताका, तोरण आदि स्थापित करें.

 राम मंत्र का जाप

आखिर में इस मंत्र का जाप करते हुए समर्पण करें।

मंत्र-  कृतेनानेन पूजनेन श्री सीतारामाय समर्पयामि।

भगवान राम की पूजा शुद्ध मन एवं विधि पूर्वक सम्पन्न करने से व्रती को समस्त प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती है. पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए। उसके बाद उन्हें गाय, जमीन, कपड़े और दक्षिणा देकर दोनों हाथ जोड़कर विदा करना चाहिए।