क्यों पहनी जाती है ‘कछुए वाली अंगूठी’ (kachuve-wali-anguthi)?

September 3, 20171min16970

कछुए वाली अंगूठी (kachuve-wali-anguthi)

वास्तु शास्त्र क्या कहता है 

ज्योतिष शास्त्र की सलाह से कई लोग हाथ में अलग अलग रत्नों की अंगूठी या फिर ब्रेसलेट में या गले की चेन में रत्नों को मढ़वाकर पहनते हैं। आजकल रत्नों के अलावा भी कई तरह की अंगूठियां लोगों के हाथों में दिखती हैं, जिसमें से एक है कछुए वाली अंगूठी (Turtle ring)। आखिर इस तरह की अंगूठी क्यों पहनी जाती है। क्या इसका फैशन से तो कोई तल्लुक है, इन सभी सवालों का जवाब मिला है ज्योतिषशास्त्र  एवं  वास्तु शास्त्र में।मूलरूप से यह एक फेंगशुई वस्तु (Feng shui item)है। जापानी मान्यता के अनुसार इसे समृद्धि का प्रतीक माना गया है।  वहीं भारत में इस अंगूठी को भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी से जोड़कर देखा जा रहा है. यह अंगूठी व्यक्ति के जीवन के कई दोषों को शांत करने का काम करती है। लेकिन यदि सबसे अधिक यह ‘आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी’ में सहायक होती है.

 

 

 

पौराणिक कथा (Mythology)

दरअसल शास्त्रों के अनुसार कछुआ जो कि जल में रहता है, यह सकारात्मकता और उन्नति का प्रतीक माना गया है। यही कछुआ भगवान विष्णु का भी अवतार रहा है। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के अनुसार कछुआ समुद्र मंथन से उत्पन्न हुआ था और साथ ही देवी लक्ष्मी भी वहीं से आईं थीं।

किस्मत का कनेक्शन (Connection of luck)

मेहनत के साथ साथ किस्मत का कनेक्शन भी मन जाता है, कहते हैं कि मेहनत अपने हाथ है लेकिन भाग्य तो ऊपर वाले के हाथ में है। लेकिन हम कहें कि अपना भाग्य आप खुद बदल सकते हैं तो। जी हां ज्योतिष शास्र्त्र में कैसे ऐसे उपाय बताए गए हैं जिनको आजमा कर आप अपनी किस्मत के बंद दरवाजे को खोल सकते हैं। इनमे एक है उपाय है कछुवे वाली अंगूठी।

समृद्धि का प्रतीक (Symbol of Prosperity)

वास्तु शास्त्र में कछुए को इतना महत्व प्रदान किया जाता है। कछुए को देवी लक्ष्मी के साथ जोड़कर धन बढ़ाने वाला माना गया है। इसके अलावा यह जीव धैर्य, शांति, निरंतरता और समृद्धि का भी प्रतीक है।

चांदी की अंगूठी

वास्तु शास्त्र के अनुसार कछुए वाली अंगूठी सामान्यत: चांदी से ही बनी हो। यदि आप किसी दूसरी धातु का प्रयोग करना चाहें जैसे कि सोना या कोई अन्य रत्न, तो कछुए के आकार को चांदी में बनवाकर उसके ऊपर सोने का डिजाइन या रत्न को जड़वा सकते हैं।

सावधानियां (Precautions)

ध्यान रखें कि इस अंगूठी को इस तरह बनवाएं की कछुए के सिर वाला हिस्सा पहनने वाले व्यक्ति की ओर आना चाहिए। कछुए का मुख बाहर की ओर होगा तो धन आने की बजाए हाथ से चला जाएगा।  इस अंगूठी को सीधे हाथ में ही पहना जाता है। सीधे हाथ की मध्यमा या तर्जनी अंगुली में इसे पहनें। कछुए को मां लक्ष्मी के साथ जोड़ा गया है इसलिए इसे धारण करने का दिन भी शुक्रवार ही है, जो कि धन की देवी को प्रसन्न करने का दिन माना जाता है।

शुक्रवार को पहने

शुक्रवार के दिन ही इस अंगूठी को खरीदें और घर लाकर लक्ष्मी जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने कुछ देर रख दें। फिर इसे दूध और पानी के मिश्रण से धोएं और अंत में अगरबत्ती कर पहन लें। यदि आप चाहें तो इस दौरान मां लक्ष्मी के बीज मंत्र का निरंतर जाप भी कर सकते हैं।

ऐसा न करे

रिंग पहनने के बाद इसे अधिक घुमाना सही नहीं है। यदि आप इसे घुमाए रहेंगे तो उसके साथ कछुए का सिर भी अपनी दिशा बदलेगा जो कि आने वाले धन में रुकावट ला सकता है।आप भी कछुए वाली अंगूठी पहनने का विचार बना रहे हैं तो पहले आपको इससे जुड़ी सावधानियों बरतनी है , ताकि यह अंगूठी किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव ना दे सके। पहले तो कछुए की अंगूठी को पहनते समय आपको इसके सिर को लेकर ध्यान देना है। कछुए के सिर वाला भाग पहनने वाले की तरफ होना चाहिए। इस से असीम कृपा मिलती है। घर में दौलत का भंडार लग जाता है। इस तरह से अंगूठी पहनने से ये पैसे को अपनी तरफ आकर्षित करता है। कछुए की अंगूठी को सीधे हाथ की मध्यमा या तर्जनी उंगली में पहनना चाहिए।

मान जाती है रूठी हुई किस्मत

पहनने से पहले लक्ष्मी जी के सामने दूधिया पानी से धोकर अगरबत्ती जलाएं। इस विधि से ऐसा भी नहीं है कि इस अंगूठी को धारण करने मात्र से आप पर पैसे की बरसात होने लगेगी। आपकी मेहनत भी तो जरूरी है। हां इस अंगूठी को पहनने से जो आपके भाग्य का धन है, उसकी रुकावटें दूर हो जाएंगी। कछुए को संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। कछुएं वाली अंगूठी को आप अपनी सामर्थ्य के मुताबिक बनवा सकते हैं। चांदी, सोने में जडे नग द्वारा भी बनवा सकते हैं।





About us

AMSG MEDIA INFOLINE is a knowledge centric organization, hosting one of its kinds of website “dharam.tv” we are providing premium online information services in field of Religious, Ritual, Spirituality, Festivals & Cultural Activities, Astrologers, Guru, Pandit and related information’s in line. Our motto is for spreading knowledge that is useful to everyone.


CONTACT US

CALL US ANYTIME