बही-खाता पूजन 2019 : दिवाली पर इस विधि से करें पूजन , दौड़ेगा कारोबार - dharam.tv

October 8, 20191min2590

दिवाली बही-खाता पूजन(Bahi-Khata poojan) 2019  : दुकानदार और व्यापारी ऐसे करें बही-खाता पूजन की तैयारी, बही-खाता पूजन से कारोबार होगा समृद्ध और खुशहाल, ऐसे बदलें बही-खाता

 

कंप्यूटर ने भले ही भारत में पारंपरिक बही-खातों के व्यापार को सतह से ओझल कर दिया हो लेकिन दिवाली पूजन में व्यापारी अब भी बही-खातों की ही पूजा करते हैं. की-बोर्ड पर सरपट दौड़ती अंगुलियां कंप्यूटर के पर्दे पर एक मोहक संसार रचती है. बही-खातों में कागज़ और स्याही का समागम है जो समय के साथ धुंधली तो पड़ सकती है लेकिन डिलीट नहीं हो सकती.

हालांकि इसमें कुछ कमी आई है क्योंकि नयी पीढ़ी के कुछ लोग आधुनिक लैपटॉप और कंप्यूटर की भी पूजा करने लगे हैं. लेकिन जो व्यापारी अब भी बही-खातों से ही दिवाली पूजन करते हैं. बही-खातों के साथ व्यापारी तराज़ू और नाप-माप के औजारों की भी पूजा करते हैं.भारत में बहुतेरे लोग बेतरतीब ज़िंदगी जीते हैं मगर व्यापार को नाप-तौल मानते हैं.  तराज़ू अब डिजिटल हो गए हैं. व्यापार में उतार-चढ़ाव और लाभ-हानि के सौदे साल भर कंप्यूटर के पर्दे पर दर्ज होते रहते हैं लेकिन जब दिवाली के मौके पर व्यापार से जुड़े लोगों ने पारंपरिक बही-खातों के आगे श्रद्धा से सिर झुका दिया है .

कंप्यूटर पर आप स्वास्तिक नहीं बना सकते. बही-खाते के साथ विधि-विधान से पूजा की जा सकती है. भारत में मारवाड़ी व्यापारी इन्हीं बही-खातों और मुनीमों की मदद से सदियों तक अपनी कामयाबी की कहानी सुनाते रहे हैं. सुर्ख आवरण, पन्नों पर स्वास्तिक और अक्षत-मौली व्यापारी को ये यकीन दिलाते हैं कि उसके व्यापार का विस्तार होगा. बही खातों के पन्नों पर स्वास्तिक और अक्षत-मौली से पूजा की जाती है.

दिवाली से व्यापारियों का नया साल शुरू

दिवाली का दिन दुकानदार और व्यापारियों के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन से बही खाते में काम शुरू होता है. दिवाली में दुकानदार और व्यापारी बही-खातों, तराजू और गल्ला से ही लक्ष्मी और गणेश की पूजा करते हैं. दिवाली के मौके पर बही खातों के लिए भी एक शुभ मुहूर्त होता है. इतना ही नहीं, बही खातों के बदलने के लिए भी खास नियम और विधि का ख्याल रखना पड़ता है. बही खातों के पूजन से पहले शुभ मुहूर्त में नये बही खाता पर केसर युक्त चंदन से या फिर लाल कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए.

दुकानदार और व्यापारी ऐसे बदलें बही-खाता

ऐसी मान्यता है कि दिवाली के पहले ही शुभ मुहूर्त देखकर दुकानदार और व्यापारी बही खाते बाजार से खरीद लाते हैं. उसके बाद दिवाली के दिन पूजा के शुभ मुहूर्त में बही खाते की पूजा होती है. बही खाते की पूजा के समय नए और पुराने दोनों बही खाते को साथ रखा जाता है. गणेश लक्ष्मी जी की पूजा के बाद नये बही खातों को प्रचलन में लाया जाता है और पुराने को प्रयोग से बाहर कर दिया जाता है.

हालांकि, पुराने बही खातों को हटाने का मतलब ये नहीं होता है कि उसे जला दें या फिर उसे रद्दी के भाव में बेच दे. ऐसी मान्यता है कि बही खातों को सहेज कर रखा जाता है. इससे व्यवसाय और दुकान से जुड़े सारे रिकॉर्ड उपलब्ध होते हैं. इसलिए पुराने बही खातों की भी पूजा गणेश-लक्ष्मी पूजा के साथ करनी चाहिए. इस दिन से नये बही खातों को प्रचलन में लाया जाता है.

लक्ष्मी-गणेश पूजा के समय नवग्रह यंत्र बनाने की परंपरा है. पूजा के लिए भगवान गणेश और लक्ष्मी जी की मूर्ति को स्थापित किया जाता है. साथ ही दीपक जलाया जाता है, फूल-अक्षत, गंगाजल आदि रखे जाते हैं. साथ ही पूजा के मंडप को भी खूब अच्छे तरीके से सजाया जाता है.

बही खाता के ऊपर चंदन या हल्दी या फिर लाल रंग से ‘श्री गणेशाय नम:’ लिखना चाहिए. इसके साथ ही एक नई थैली लेकर उसमें हल्दी की पांच गांठे, कमलगट्ठा, अक्षत, दुर्गा, धनिया व दक्षिणा रखकर, थैली में भी स्वास्तिक का चिन्ह लगाकर सरस्वती मां का स्मरण करना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि बही खाता के ऊपर पंडित जी से श्री गणेशाय नम: लिखवाना ज्यादा शुभ होता है.

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बही-खाता पूजन

बही खातों का पूजन करने के लिए पूजा मुहूर्त समय अवधि में नवीन खाता पुस्तकों पर केसर युक्त चंदन से या फिर लाल कुमकुम से स्वास्तिक का चिह्न बनाना चाहिए. इसके बाद इनके ऊपर ‘श्री गणेशाय नम:’ लिखना चाहिए. इसके साथ ही एक नई थैली लेकर उसमें हल्दी की पांच गांठे, कमलगट्ठा, अक्षत, दुर्गा, धनिया व दक्षिणा रखकर, थैली में भी स्वास्तिक का चिन्ह लगाकर सरस्वती मां का स्मरण करना चाहिए.

मां सरस्वती का ध्यान करें. ध्यान करें कि जो मां अपने कर कमलों में घटा, शूल, हल, शंख, मूसल, चक्र, धनुष और बाण धारण करती हैं, चन्द्र के समान जिनकी मनोहर कांति है. जो शुंभ आदि दैत्यों का नाश करने वाली है. ‘वाणी’ जिनका स्वरूप है, जो सच्चिदानन्दमय से संपन्न हैं, उन भगवती महासरस्वती का मैं ध्यान करता हूं. ध्यान करने के बाद बही खातों का गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन करना चाहिए.

जहां पर नवग्रह यंत्र बनाया गया है, वहां पर रुपया, सोना या चांदी का सिक्का, लक्ष्मी जी की मूर्ति या मिट्टी के बने हुए लक्ष्मी-गणेश-सरस्वती जी की मूर्तियां सजायें. कोई धातु की मूर्ति हो तो उसे साक्षात रूप मानकर दूध, दही ओर गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत, चंदन का श्रृंगार करके फूल आदि से सजाएं. इसके ही दाहिने और एक पंचमुखी दीपक अवश्य जलायें, जिसमें घी या तिल का तेल प्रयोग किया जाता है.

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बही-खाता पूजन को चोपड़ी पूजन भी कहते हैं

दीपावली पर कारोबारी विशेष पूजा करके अपनी बही-खाते की बुक्स बदलते हैं। इस पूजा को चोपड़ी पूजन और शारदा पूजन भी कहते है। देशभर में बनिया समुदाय चोपड़ी पूजन के लिए बही-खाते की बुक्स धनतेरस पर खरीद लेते हैं। इसके साथ ही पूजा के लिए शुभ मुहूर्त भी तय किया जाता है।

 

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