ऐसे करें गणेश, लक्ष्मी, कुबेर का पूजन , होगी हर मनोकामना पूरी

October 19, 20171min5850
कार्तिक मास की अमावस्या को भगवान राम 14 साल बाद अयोध्या लौटे सबने दीप जलाकर उनका स्वाग़त किया, आज के दिन किसी भी प्रकार से मन्त्र साधना ,उपासना ,कार्य सिद्ध और गणेश (ganesha) महालक्ष्मी( Lakshmi) , कुबेर (kuber) के पूजन से सभी मनोरथ पूर्ण किये जा सकते है,  कैसे ? बता रहें हैं पं सुनील भारद्वाज

पूजा मुहूर्त

समय- 1 घंटा और 5 मिनट
मां लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त- 05.43 से 08.06
वृषभ काल- 7.11 से 9.06
2. चौघड़िया पूजा मुहूर्त
सुबह- 6.28 से 7.53
शाम- 4.19 से 8.55
3.महानिशिता काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा का अवधि- 51 मिनट
महानिशिता काल- 11.40 से 12.31

पूजा की सामग्री

1. लक्ष्मी व श्री गणेश की मूर्तियां (बैठी हुई मुद्रा में)
2. केशर, रोली, चावल, पान, सुपारी, फल, फूल, दूध, खील, बताशे, सिंदूर, शहद, सिक्के, लौंग.
3. सूखे, मेवे, मिठाई, दही, गंगाजल, धूप, अगरबत्ती, 11 दीपक
4. रूई तथा कलावा नारियल और तांबे का कलश चाहिए.

पूजा की तैयारी

  लाल कापड़ा बिछाकर चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियाँ इस प्रकार रखें कि उनका मुख पश्चिम में रहें. लक्ष्मीजी,गणेशजी की दाहिनी ओर रहें. पूजनकर्ता मूर्तियों के सामने की तरफ बैठे. कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें. नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें. यह कलश वरुण का प्रतीक है.
लक्ष्मीजी की ओर श्री का चिह्न बनाएँ. गणेशजी की ओर त्रिशूल, चावल का ढेर लगाएँ. सबसे नीचे चावल की नौ ढेरियाँ बनाएँ. छोटी चौकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें. तीन थालियों में निम्न सामान रखें.
ग्यारह दीपक(पहली थाली में)
खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप  सिन्दूर कुंकुम, सुपारी, पान (दूसरी थाली में)
फूल, दुर्वा चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक. (तीसरी थाली में)
इन थालियों के सामने पूजा करने वाला स्व्यं बैठे. परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें. शेष सभी परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे.

लक्ष्मी पूजन विधि

आप हाथ में अक्षत, पुष्प और जल ले लीजिए. कुछ द्रव्य भी ले लीजिए. द्रव्य का अर्थ है कुछ धन. यह सब हाथ में लेकर संकसंकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हो. सबसे पहले गणेश जी व गौरी का पूजन कीजिए.
• पूजा प्रारम्भ करने से पहले जलपत्र एवं कलश मे गंगा जल मिला लें ।
• ताम्बूल बनाने के लिये पान के पत्ते को उल्टा करके उस पर लौंग इलायची सुपारी एवं कुछ मीठा रखें ।
• दुर्वा में तीनपत्ती होनी चहिये ।
• गणपति पर तुलसी दल ना चढ़ायें ।
• श्री लक्ष्मी जी को कमल का फूल बहुत प्रिय है ।
• जमीन पर गिरा हुआ ,बासी ,कीड़ा खाया हुआ फूल न चढ़ायें ।
• टूटी फूटी मुर्तियों को नदी मे, मंदिर में या पीपल के नीचे विसर्जित करे ।
• लक्ष्मी प्राप्ति के लिये लक्ष्मी मंत्र कमलगट्टे की माला पर जपना अधिक उत्तम होता है।
• धन प्राप्ति के लिये लाल आसन उत्तम रह्ता है ।
• ध्यान रहे कि पूजा करते समय या मंत्र उच्चारण के समय हाथ कभी भी खाली ना रहे । हाथ मे फूल या चावल अवश्य रखें ।
• घी का दीपक भगवान की मूर्ति के दाई ओर एवं तेल का दीपक बाई ओर रखे। धूप जल पात्र बाई ओर ही स्थापित करें।
• रक्षा सूत्र (मौली) बांधते समय हाथ मे पैसा एवं अक्षत ले खाली हाथ रक्षा सूत्र ना बांधे ।
• यदि पूजा करते समय कोइ भी चीज़ कम पड़ जाये तो आप उसकी जगह साबुत लाल चावल चढ़ा सकते है ।
•दीपावली पूजन के पश्चात सभी सामग्री देवि एवं देवताओ की स्थापना को सारी रात यथा स्थान रहने दे। विसर्जन अगले दिन करे । ध्यान रहे कि गणेश लक्ष्मी जी की मूर्ति को विसर्जन नहीं करना है, एक वर्ष रखना होता है अगले वर्ष नई मूर्तियो के पूजन के बाद ही पुराने वर्ष की मूर्ति को विसर्जन करना चहिये ।
•चढ़ाई हुइ दक्षिणा किसी ब्राह्मण को दे या मंदिर में दान करे ।

मंत्र का करें उच्चारण

 श्री गणेश, श्री महालक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, व्यापारिक खातों का पूजन, दीपदान, अपने सेवकों को वस्तुएं दान करने के लिये शुभ रहेगा. प्रदोष काल मंदिर मे दीप दान, रंगोली और पूजा की पूर्ण तयारी कर लेनी चाहिए. इसी समय मे मिठाई वितरण कार्य भी संपन्न कर लेना चाहिए. द्वार प़र स्वस्तिक और शुभ लाभ का सिन्दूर से निर्माण भी इसी समय करना चाहिए.





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