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November 9, 20191min6030

Ayodhya Verdict: कौन हैं रामलला विराजमान (Ram Lalaa Virajman) , जिन्हें मिली अयोध्या की विवादित जमीन

अयोध्या मामले (Ayodhya Case) पर देश की शीर्ष अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल रामलला विराजमान (Ram Lalla Virajman) को दिया है. कोर्ट ने केंद्र को आदेश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड (मुस्लिम पक्ष) को मस्जिद के लिए वैकल्पिक जमीन दी जाए.

आइए जानते हैं कौन हैं रामलला विराजमान और क्या हैं इसकी कहानी

हिंदू परंपरा के अनुसार, भगवान को वैध व्यक्ति माना गया है, जिनके अधिकार और कर्तव्य होते हैं. भगवान किसी संपत्ति के मालिक भी हो सकते हैं. साथ ही वो किसी पर मुकदमा दर्ज कर सकते हैं या उनके नाम पर मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है. हिंदू कानून में देवताओं की मूर्तियों को वैध व्यक्ति माना गया है. विवादित स्थल पर जहां राम लला की जन्मभूमि मानी जाती है, वहां राम लला एक नाबालिग रूप में थे.

रामलला एक नाबालिग रूप में

इस केस में रामलला को भी नाबालिग और न्यायिक व्यक्ति मानते हुए उनकी तरफ से कोर्ट में ये मुकदमा विश्व हिंदू परिषद के सीनियर नेता त्रिलोकी नाथ पांडे ने रखा था.
23 दिसंबर 1949 में मस्जिद में मूर्तियां रखने का मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके आधार पर 29 दिसंबर 1949 को मस्जिद कुर्क कर उस पर ताला लगा दिया गया था.कोर्ट ने तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष प्रिय दत्त राम को इमारत का रिसीवर नियुक्त किया था और उन्हें ही मूर्तियों की पूजा आदि की जिम्मेदारी दे दी थी.

Ayodhya Verdict : जानिए 106 साल पुराने विवाद का संपूर्ण घटनाक्रम
इसके बाद 1989 में विश्व हिंदू परिषद के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज देवकी नंदन अग्रवाल ने भगवान राम के सखा (मित्र) के रूप में पांचवां दावा फैजाबाद की अदालत में दायर किया.देवकी नंदन अग्रवाल ने दावा किया था कि 23 दिसंबर 1949 को राम चबूतरे की मूर्तियां मस्जिद के अंदर रखी गई थीं. साथ ही जन्म स्थान और भगवान राम दोनों पूज्य हैं. रामलला ही इस संपत्ति के मालिक भी हैं.

ऐसे में रामलला और कोई नहीं, बल्कि स्वयं भगवान राम के नाबालिग स्वरूप को माना गया है. कोर्ट ने उन्हें ही विवादित जमीन का मालिक मानते हुए मालिकाना हक दिया है.

Supreme Court Ayodhya Verdict: राम मंदिर निर्माण के लिए बनेगा ट्रस्ट

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया फैसला?

अयोध्या पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरा विवादित स्थल राम लला विराजमान को दे दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी. हिंदू विवादित स्थल के अंदरूनी हिस्से को रामलला का जन्मस्थान मानते हैं. अदालत ने सरकार को मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने को कहा है.
मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में कहीं भी 5 एकड़ जमीन आवंटित की जाएगी. वहीं, अदालत ने शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा के दावे खारिज कर दिए हैं.
सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों वाली संवैधानिक बेंच ने अयोध्या पर ये ऐतिहासिक फैसला दिया. इस बेंच में प्रधान न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई, जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस.ए. नजीर शामिल रहे. सीनियर एडवोकेट के. पारासरन (93) सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान का पक्ष रख रहे थे.

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November 9, 20191min4410

Supreme Court Ayodhya Verdict : अयोध्या मामले में अब तक का सबसे बड़ा फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी जाए. चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ( सीजेआई) रंजन गोगोई ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाया जाए साथ ही केंद्र सरकार तीन महीने में इसकी योजना बनाए. वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन देने का भी फैसला किया गया है. सीजेआई ने कहा कि ये पांच एकड़ जमीन या तो अधिग्रहित जमीन से दी जाए या फिर अयोध्या में कहीं भी दी जाए. वहीं 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर सरकार का अधिकार रहेगा.

राम मंदिर निर्माण के लिए बनेगा ट्रस्ट : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)

चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ( सीजेआई) ने कहा कि प्राचीन यात्रियों ने जन्मभूमि का जिक्र किया है. 1949 तक मुस्लिम मस्जिद में नमाज पढ़ते थे इसके बाद इसमें ताला लगवाया गया. मुस्लिमों ने मस्जिदों को कभी नहीं छोड़ा. सीजेआई ने कहा संविधान की नजर में आस्थाओं में भेदभाव नहीं. सीजेआई ने कहा, कोर्ट आस्था नहीं सबूत पर फैसला देती है. हिंदू पक्ष ने बाहरी हिस्से में दावा साबित किया, अंदरूनी हिस्सा विवादित. उन्होंने कहा कि संविधान आस्था की मूल भावना है. उन्होंने कहा कि 1856 से पहले मुस्लिमों का मुख्य गुंबद पर दावा नहीं था.

इससे पहले सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि इतिहास जरूरी लेकिन कानून सबसे ऊपर होता है. सीजेआई ने कहा कि मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी लेकिन 1949 में आधी रात में राम की प्रतिमा रखी गई थी. मस्जिद कब बनाई गई इसका वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है. सीजेआई ने कहा कि हम सबके लिए पुरातत्व, धर्म और इतिहास जरूरी है लेकिन कानून सबसे ऊपर है. सभी धर्मों को समान नजर से देखना हमारा कर्तव्य है. देश के हर नागरिक के लिए सरकार का नजरिया भी यही होना चाहिए.

राम जन्म भूमि न्यायिक व्यक्ति नहीं है : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)

फैसला सुनाते हुए सीजेआई ने कहा कि राम जन्म भूमि न्यायिक व्यक्ति नहीं है. अयोध्या मामले में निर्मोही अखाड़े का खारिज करते हुए कोर्ट ने रामलला विराजमान कानूनी तौर पर मान्यता है. सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा विचार करने योग्य है. इसी के साथ उन्होंने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता. खुदाई में मिला ढांचा गैर इस्लामिक था. हालांकि एएसआई ये नहीं कहा कि मस्जिद मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी. एएसआई की रिपोर्ट में जमीन के भीतर मंदिर होने के सबूत दिए गए हैं.

सीजेआई ने कहा दोनों पक्षों की दलीलें कोई नतीजा नहीं देतीं. फैसला सुनाते हुए सीजेआई ने कहा कि आस्था पर जमीन के मालिकाना हक का फैसला नहीं किया जा सकता. हिंदू मुख्य गुंबद को ही राम का जन्म स्थान मानते हैं जबकि मुस्लिम उस जगह नमाज अदा करते थे. हिंदू पक्ष जिस जगह सीता रसोई होने का दावा करते हैं, मुस्लिम पक्ष उस जगह को मस्जिद और कब्रिस्तान बताता है. सीजेआई ने कहा, अंदरूनी हिस्से में हमेशा से पूजा होती थी. बाहरी चबूतरा, राम चबूतरा और सीता रसोई में भी पूजा होती थी.

Ayodhya Verdict : जानिए 106 साल पुराने विवाद का संपूर्ण घटनाक्रम

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November 9, 20191min2370

Ayodhya Verdict : जानिए 106 साल पुराने विवाद का संपूर्ण घटनाक्रम सिर्फ 2.38 मिनट में

Ayodhya Verdict: प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने, अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि 3 पक्षकारों (सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान) के बीच बराबर-बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर 6 अगस्त से रोजाना 40 दिन तक सुनवाई की थी। इस दौरान विभिन्‍न पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की थीं।

संविधान पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिए 3 दिन का समय दिया था। उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सभी पक्षकारों की दलीलों को विस्तार से सुना। संविधान पीठ द्वारा किसी भी दिन फैसला सुनाए जाने की संभावना को देखते हुए केंद्र ने देशभर में सुरक्षा बंदोबस्त कड़े कर दिए थे। अयोध्या में भी सुरक्षा बंदोबस्त चाक-चौबंद किए गए हैं ताकि किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं हो सके।

 

Ayodhya Verdict

संविधान पीठ ने इस प्रकरण पर 6 अगस्त से नियमित सुनवाई शुरू करने से पहले मध्यस्थता के माध्यम से इस विवाद का सर्वमान्य समाधान खोजने का प्रयास किया था। न्यायालय ने इसके लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्‍त न्यायाधीश एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय मध्यस्थता समिति भी गठित की थी, लेकिन उसे इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद, प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने सारे प्रकरण पर 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई करने का निर्णय किया।

शुरुआत में निचली अदालत में इस मसले पर 5 वाद दायर किए गए थे। पहला मुकदमा ‘रामलला’ के भक्त गोपाल सिंह विशारद ने 1950 में दायर किया था। इसमें उन्होंने विवादित स्थल पर हिन्दुओं के पूजा-अर्चना का अधिकार लागू करने का अनुरोध किया था। उसी साल, परमहंस रामचंद्र दास ने भी पूजा-अर्चना जारी रखने और विवादित ढांचे के मध्य गुंबद के नीचे ही मूर्तियां रखी रहने के लिए मुकदमा दायर किया था, लेकिन बाद में यह मुकदमा वापस ले लिया गया था।

Ayodhya में राम मंदिर किसने बनाया था और किसने तोडा था ?

बाद में निर्मोही अखाड़े ने 1959 में 2.77 एकड़ विवादित स्थल के प्रबंधन और शेबैती अधिकार के लिए निचली अदालत में वाद दायर किया। इसके 2 साल बाद 1961 में उप्र सुन्नी वक्फ बोर्ड भी अदालत में पहुंचा और उसने विवादित संपत्ति पर अपना मालिकाना हक होने का दावा किया। ‘रामलला विराजमान’ की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश देवकीनंदन अग्रवाल और जन्मभूमि ने 1989 में मुकदमा दायर कर समूची संपत्ति पर अपना दावा किया और कहा कि इस भूमि का स्वरूप देवता का और एक ‘न्यायिक व्यक्ति’ जैसा है।

अयोध्या में 6 दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने की घटना और इसे लेकर देश में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद सारे मुकदमे इलाहाबाद उच्च न्यायालय को निर्णय के लिए सौंप दिए गए थे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 30 सितंबर, 2010 के फैसले में 2.77 एकड़ विवादित भूमि 3 पक्षकारों (सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला) के बीच बांटने के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत ने मई 2011 में उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुए अयोध्या में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।

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November 9, 20191min2310

अयोध्या ( Ayodhya) हिन्दुओं के प्राचीन और 7 पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। यह प्राचीन नगर रामायण काल से भी पुराना है। अयोध्या (Ayodhya) ने बहुत कुछ देखा और भोगा है। आओ जानते हैं अयोध्या के बारे में कुछ ख़ास तथ्य

अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) किसने बनाया था?

महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या (Ayodhya) उजड़-सी हो गई, मगर श्रीराम जन्मभूमि का अस्तित्व फिर भी बना रहा। ऐसा कहा जाता है कि यहां जन्मभूम पर कुश ने एक मंदिर बनवाया था। इसके बाद यह उल्लेख मिलता है कि ईसा के लगभग 100 वर्ष पूर्व उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने यहां एक भव्य मंदिर के साथ ही कूप, सरोवर, महल आदि बनवाए। कहते हैं कि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि पर काले रंग के कसौटी पत्थर वाले 84 स्तंभों पर विशाल मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती थी। विक्रमादित्य के बाद के राजाओं ने समय-समय पर इस मंदिर की देख-रेख की। उन्हीं में से एक शुंग वंश के प्रथम शासक पुष्यमित्र शुंग ने भी मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। अनेक अभिलेखों से ज्ञात होता है कि गुप्तवंशीय चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय और तत्पश्चात काफी समय तक अयोध्या गुप्त साम्राज्य की राजधानी थी। गुप्तकालीन महाकवि कालिदास ने अयोध्या का रघुवंश में कई बार उल्लेख किया है। यहां पर 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग आया था। उसके अनुसार यहां 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3,000 भिक्षु रहते थे और यहां हिन्दुओं का एक प्रमुख और भव्य मंदिर भी था, जहां रोज हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते थे।

 किसने तोड़ा था अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) ?

विभिन्न आक्रमणों के बाद भी सभी झंझावातों को झेलते हुए श्रीराम की जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर 14वीं शताब्दी तक बचा रहा। कहते हैं कि सिकंदर लोदी के शासनकाल के दौरान यहां भव्य मंदिर मौजूद था। 14वीं शताब्दी में हिन्दुस्तान पर मुगलों का अधिकार हो गया और उसके बाद ही राम जन्मभूमि एवं अयोध्या को नष्ट करने के लिए कई अभियान चलाए गए। अंतत: 1527-28 में इस भव्य मंदिर को तोड़ दिया गया और उसकी जगह बाबरी ढांचा खड़ा किया गया। कहते हैं कि मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर के सेनापति मीर बकी ने बिहार अभियान के समय अयोध्या में श्रीराम के जन्मस्थान पर स्थित प्राचीन और भव्य मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद बनवाई थी, जो 1992 तक विद्यमान रही।

|| श्री राम स्तुति || Dharam Tv

राम जन्मभूमि विवाद कब से हैं?

कुछ लोग मानते हैं कि यह विवाद 1813 का नहीं है जब पहली बार हिन्दू संगठनों ने दावा किया कि यह भूमि हमारी है। यह विवाद तब का भी नहीं है जब 1853 में इस स्थान के आसपास पहली बार सांप्रदायिक दंगे हुए। यह विवाद तब का भी नहीं है जब 1859 में अंग्रेजी प्रशासन ने विवादित जगह के आसपास बाड़ लगा दी और मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की अनुमति दी गई थी। यह विवा तब का भी नहीं है जब फरवरी 1885 में महंत रघुबर दास ने फैजाबाद के उप-जज के सामने याचिका दायर कर मंदिर बनाने की इजाजत मांगी, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली।
कुछ लोग मानते हैं कि यह विवाद 1949 का भी नहीं है जबकि बाबरी ढांचे के गुम्बद तले कुछ लोगों ने मूर्ति स्थापित कर दी थी। यह विवाद तब का (1992) का भी नहीं है जबकि भारी भीड़ ने विवादित ढांचा ध्वस्त कर दिया था। वस्तुत: यह विवाद 1528 ईस्वी का है, जब एक मंदिर को तोड़कर बाबरी ढांचे का निर्माण कराया गया था।

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October 25, 20191min4350

Lakshmi Beej Mantra 108 Times by Rashi Khanna

Lakshmi Beej Mantra (लक्ष्मी बीज मन्त्र,) Om Hreem Shreem Lakshmibhayo Namah ( ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नम:)
दिवाली के आलावा धन प्राप्ति का यह मंत्र रोज कम से कम 1 बार जरूर पढ़ें या सुनें. इस मंत्र के जाप से अपार धन की प्राप्ति होगी . लक्ष्मी बीज मन्त्र को देवी लक्ष्मी की सभी शक्तियों के स्रोत के रूप में माना जाता है। देवी लक्ष्मी का बीज मन्त्र श्री है, जिसे अन्य मन्त्रों के साथ संयुक्त करके विभिन्न मन्त्र बनाये जाते हैं.

 

 

॥ Om Hreem Shreem Lakshmibhayo Namah॥

Read Also: Auspicious signs for money : Diwali 2019

Lakshmi Beej Mantra

सुख व ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी से जुड़ी शास्त्रों में लिखी बातों का एक संकेत यह भी है कि माता लक्ष्मी कर्म और कर्तव्य से जुड़े इंसान पर हमेशा मेहरबान रहती है। माता लक्ष्मी के भगवान विष्णु का संग चुनने के पीछे भी यही बात साफ होती है क्योंकि श्री हरि विष्णु जगत पालक माने गए हैं। पालन के पीछे भी निरंतर कर्म, पुरुषार्थ और कर्तव्य का ही मूल भाव है।
हर इंसान धन और समृद्धि के रूप में लक्ष्मी की प्रसन्नता की कामना रखता है, पर लक्ष्मी कृपा के लिए पवित्रता और परिश्रम जैसी कर्म, व्यवहार और स्वभाव में उतारने की अहम सीखों को विरले इंसान ही अपनाते हैं। यही कारण है कि सच्चाई व मेहनत के बिना पाया भरपूर धन भी मानसिक शांति छीन लेता है, तो कभी धन का अभाव जीवन को अशांत करता है।
इस तरह, धन का सुख, दायित्वों को समझ किसी काम से जुड़े बिना संभव नहीं होता। साथ ही मन और व्यवहार की पवित्रता दूसरों को भी सुख देती है। इसके लिए पावनता और वैभव की देवी माता लक्ष्मी की साधना बहुत ही शुभ मानी गई है।
शुक्रवार के दिन माता दुर्गा की तीन शक्तियों में एक लक्ष्मी की साधना तमाम वैभव और यश देने वाली मानी गई है।

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October 20, 20194min4690

Signs before Diwali that indicate Good News is coming your way!

Auspicious signs for money ( Diwali 2019) : Not each day is same as the other; some days bring along good news, while a few fall dull. With each festivity, we wish to welcome good fortune, peace, and prosperity in life, and there are times when each of the above arrives in even before we wish for them.

Auspicious Signals about money growth

There are many indications as mentioned in several Hindu scriptures that may be a sign of any upcoming good news or desirous results of efforts- be it related to your work, education, love life, marriage, wealth etc. You only need to have a keen observation.

Divine energy

Shastras advise that one must be very observant before commencing an important task, as there are times when divine signals are sent their ways.

Importance of Diwali puja

With Diwali round the corner, people are set to worship Laxmi-Ganesha and await their holy presence and blessings upon them and their families. It is believed that on the auspicious festival Goddess Laxmi and Lord Ganesha shower their divine blessings, on those, who keep their hearts, homes, and environment, clean and habitable for them.

Goddess Laxmi on Diwali (signs for money)

However, some shastras explain that if the following signals come your way, then it’s a signs that Goddess Laxmi and Lord Ganesha have already sent their blessings towards you….

Money slipping away

If you often find money slipping away your hand, during any transaction (even in your dreams) then it’s an indication that your financial stand is set to increase and will reflect on your asset.

If you consistently find yourself, scratching your palms, or chest, then it’s an indication of immense wealth-related opportunities coming your way.

Auspicious signs for money

Dreaming of ancestors

If you are visited by your ancestors in your dreams, during these auspicious days, then it’s a sign of receiving good news related to ancestral property matter.

Number 8

If you happen to see number 8 appearing more than often in front of you, then it’s an auspicious sign, this number is associated with Goddess Laxmi.

Diwali 2019 Date: Know about shubh muhurat and puja vidhi

Bugs and insects

When you see bugs and insects, especially ants loiter your home or crawling indoors, then it is believed to be a good sign of auspicious events to happen soon.

 

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Read Also: Special Remedies to do on Diwali 2019

Auspicious signs for money

Although this indication has no theory to support its existence, it is said that if you often find thick spider-web around your home, during or before Diwali, then it’s an indication that huge wealth boost is around the corner.

 

 


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October 18, 201915min4790

Special Remedies to do on Diwali 2019

In Vedic astrology, remedies are available for all sorts of obstacles and problems in human life. Diwali special remedies are performed to seek money and wealth and these are considered highly effective. We are giving some of the most popular remedies which are performed during Diwali to seek blessings of Goddess Lakshmi. Some remedies are quite simple and integral part of normal Puja activities performed during five days Diwali festivities 2019.

Know about Shri Lakshmi Puja Vidhi, Ritual & Significance: Five Days of Diwali starts from Dhanteras to Bhai dooj; but in Maharashtra it starts with Vasu Baras. Main Diwali Puja falls on third day of Diwali (Diwali Amavasya). On this day Lakshmi Puja is performed along with Lord Ganesha. Apart from Lakshmi-Ganesha Puja, Kuber Puja and Bahi-Khata Puja are also done. Here is step by step process for your Diwali Lakshmi Puja.

Diwali Puja Date and Muhurat

Diwali Lakshmi Puja should be performed at an appropriate Diwali Puja Muhurat while considering fixed Lagna, Pradosh time and Amavasya Tithi. Lakshmi puja is essential ritual on Diwali. In 2019; it observes on Sunday, 27 October.

 Special Remedies for businessmen

On Diwali, during Amavasya day, newly installed statues of Lord Ganesha and Shri Lakshmi are worshipped. Apart from Lakshmi-Ganesha Puja, Kuber Puja and Bahi-Khata Puja (बही-खाता पूजा) are also done.

On the Diwali Puja day, the full day fast should be observed. The fasting should be either Nirjal (निर्जल) i.e. without the water or Phalahar (फलाहार) i.e. with fruits only or with milk only depending of the body capability and will-power of the person.

धन लक्ष्मी विशेष पूजा : राजा-महाराजा करते थे सहस्त्र रूपा सर्व्यापी लक्ष्मी का ये अनुष्ठान

Lakshmi-Ganesh-Saraswati Puja during Diwali

Diwali Puja should be done at an appropriate Diwali Puja Muhurat while considering fixed Lagna, Pradosh time and Amavasya Tithi. A complete Diwali Puja involves following Puja(s).
Atma-Shodhan – which is known as self-purification.
Sankalp – which is solemn vow to perform Diwali Puja rituals.
Shanti-Patha  – Shanti Patha Mantra is recited to bring peace, happiness and prosperity in everyone’s life.
Mangal-Patha – which is recited to fulfil wishes in everyone’s life.
Kalash-Sthapana  – detailed Puja Vidhi of Kalash Sthapana
Bhagawan Ganapati Puja  – Sankshipt five steps Ganesha Pujan Vidhi
Nav-Graha Puja  – Sankshipt Navagraha Pujan
Shodasha Matrika-Puja – Sankshipt Shodasha Matrika Pujan
New Ganesha Pratima Puja – Shodashopachara Puja of Shri Ganesha
New Shri-Lakshmi Pratima Puja  – Shodashopachara Puja of Shri Lakshmi
Maha Kali Puja – Maha-Kali Puja on Lekhani-Dawat
Saraswati Puja  – Saraswati Puja on Bahi-Khata
Kuber Puja  – Shri Kuber-Puja on Tijori-Baksa
Deep-Malika Puja  – all necessary Puja steps for Deep-Malika Puja Vidhi
Visarjan  – formal conclusion of Diwali Puja with Prayer
All above Puja(s) are done with full rituals. As full Diwali Puja might take hours to finish and available Lakshmi Puja Muhurat might be too short to perform all Puja(s), Diwali Puja can begin before Lakshmi Puja Muhurat so that Lakshmi Puja time coincides with the available Muhurat time. The remaining Puja can continue after Lakshmi Puja beyond the Muhurat time.

Special Remedies to do on Diwali 2019

Traditional remedies to appease Goddess Lakshmi during Diwali
Wealth and prosperity are the most desired things in the society. Wealth is needed for almost everything in the life. Even the spiritual and religious activities, including Puja and Hawan need money to perform them. Hence some form of wealth is also desired by sages and Pandits to keep performing their daily Puja and Hawan activities. 

Many people find it difficult to gain wealth. They always desire to achieve wealth to improve their living standard and prestige in the society. For some wealth seekers, however hard they try, all of their efforts to gain wealth and money go waste. Many blame their stars for their poverty and try to find astrological solution for their problems.

Diwali remedies to gain wealth are also known as Diwali Totake or Diwali Totke. In civil society, it has become taboo and considered superstitious to try Totake. However, Diwali remedies are getting tried since ages and still quite popular among wealth seekers.

Drawing ॐ on Dhanteras

On Dhanteras or Dhantrayodashi day, drawing ॐ (Om symbol) at the main entrance with the paste of turmeric and rice (after grinding freshly), would bring wealth and prosperity at home.

It is very simple remedy and can be tried very easily as turmeric and rice are house hold items available in most kitchens.
Blowing Shankh and Playing Damaru
After Diwali Puja, blowing Shankh and playing Damaru removes poverty and brings prosperity at home.

Conch is usually available in most Puja rooms in Hindu families. However Damaru is not that common but that can be included in Diwali Puja items. If Conch and Damaru are procured from market then it is also very simple Diwali remedy.

Special Remedies through Lakshmi Ganesha Yantra 

Shri Ganesha is the Lord of Riddhi-Siddhi and Shri Lakshmi is the Goddess of wealth and prosperity. Lakshmi Yantra and Ganesha Yantra are very powerful Yantra. The combined Lakshmi-Ganesha Yantra is called Maha Yantra and considered highly effective.

Installing Lakshmi-Ganesha Yantra with full Vedic ritual on the auspicious day of Deepavali brings everlasting wealth and prosperity at home. This remedy can be performed by a learned Pandit only.

There are guidelines on the material with which Yantra should be formed. The shape of Yantra is highly significant to fructify effectiveness of Yantra. Shapes drawn on Yantra should exactly be same as those prescribed in Vedic religious texts.

Installation of Yantra at home requires Prana-Pratishtha. During Prana-Pratishtha, the Yantra deity is invoked and requested to reside in Yantra. Each Yantra is installed after performing fixed Puja procedures as there is strong correlation in Puja steps and shapes drawn on the Yantra. Usually, no of circles, lines and corners drawn on Yantra fixes the Puja steps. It should also be noted that each Hindu deity has its own Yantra and no two Yantra are same.

On Diwali Puja day, bringing root of the sugarcane plant in the morning and worshipping it with Goddess Lakshmi during Diwali Puja brings wealth and prosperity. Mahalakshmi in the form of Dhanyalakshmi is associated with grains and sugarcane, the staple commodities in Hinduism. Sugarcane is considered sacred and many Hindu deities are portrayed as holding it in one of the hands.

It is also very simple remedy, as in most Indian towns and cities, sugarcane is widely grown commodity by Indian farmers and at most places sugarcanes are sold with their root intact especially during Puja time. However getting sugarcane with roots might be little difficult in metros.

Special Remedies through Favorite flower of Shri Lakshmi

During Lakshmi Puja, offer lotus flower to Goddess Lakshmi and do Lakshmi Japam with Mala made of Kamal-Gatte (कमल-गट्टे).

No other offering would please Goddess Lakshmi more than that of lotus flowers. If lotus flowers are not available then perform Lakshmi Japa with garland made of lotus seeds. Doing 108 Japa with Kamal-Gatte garland would be equivalent of 108 offering of lotus flowers to Goddess Lakshmi.

This remedy is quite simple. Even if one is not able to procure lotus flowers during Diwali Puja, one can use lotus seed garland to perform Lakshmi Japam. The garland made of lotus seeds is very common Puja items and can easily be procured in Puja room at any time.

Drawing Lakshmi Chauntisa Yantra during Diwali Puja

In Yantra Sadhana, Chauntisa Yantra is considered very powerful and it is considered the embodiment of happiness and prosperity. One of the Chauntisa Yantra is dedicated to Goddess Lakshmi and popularly known as Lakshmi Chauntisa Yantra.

Lakshmi Chauntisa Yantra is drawn on Bhoja Patra with red ink made of sandalwood paste and with pen made of pomegranate tree. The Yantra is kept in front of the Goddess Lakshmi during Diwali Puja. On the next day Yantra is put in the office or at home where money is kept. This remedy brings wealth and prosperity to business and home.

If Bhoja Patra, red sandalwood paste and pomegranate pen is arranged then this remedy becomes quite simple and can be performed without any assistance from learned Pandit or astrologer.

Yantra for business growth (Special Remedies)

Drawing Vyapar Vriddhi Yantra is also very popular remedy among businessmen. It is drawn on Bhoja Patra with ink made of Ashtagandha and with pen made of pomegranate tree. Ashtagandha is usually made of white sandalwood, red sandalwood, saffron, Kasturi, camphor, Agar, Tagar and Kumkum. Traditionally it is drawn in office during Diwali Puja.

Vyapar Vriddhi Yantra is the combination of two Yantra and both are drawn side by side. It is believed that the Yantra helps in growing the business. It should be noted that Vyapar Vriddhi Yantra is not the same as Lakshmi Ganesha Yantra.

If Bhoja Patra, Ashtagandha power and pomegranate pen is arranged then this remedy becomes quite simple and can be performed without any assistance from learned Pandit or astrologer. As an alternate of drawing it with hand, one can purchase metallic Vyapar Vriddhi Yantra and keep it at Puja place.

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Mahalakshmi Yantra Puja and Sthapana (Special Remedies)

Diwali Amavasya day is the most significant day to perform Mahalakshmi Yantra Puja and install it at home and office. Goddess Kamala who is one of the Dasha Mahavidya represents Goddess Lakshmi. All sorts of Puja which are dedicated to Goddess Lakshmi are part of Goddess Kalama Sadhana. Even Shri Sukta Sadhana is dedicated to Goddess Kamala.

Hence Mool Mantra of Mahalakshmi Yantra ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥ is dedicated to Goddess Kamala and it the most important Mantra to install Mahalakshmi Yantra. This Mantra has 27 syllables and because of that it is known as Saptavinshakshar (सप्तविंशाक्षर) Mantra of Goddess Kamala. Mahalakshmi Yantra Puja is based on this Saptavainshakshar Manta.

Installing Mahalakshmi Yantra with full Vedic ritual on the auspicious day of Deepavali brings everlasting wealth and prosperity at home. This remedy can be performed by a learned Pandit only as Lakshmi Yantra Puja Vidhi involves several rituals including six Avarana Puja.

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Special Remedies through Shri Sukta Yantra Puja

Shri Sukta Yantra for Sukta Sadhana
Shri Sukta is Vedic hymn to glorify the Goddess of wealth and prosperity i.e. Goddess Lakshmi. The hymn is so sacred and powerful that it is used to perform Lakshmi Sadhana. The worship of Shri Lakshmi with Shri Sukta is known as Shri Sukta Sadhana and it is performed with Shri Sukta Yantra. The installation of Shri Sukta Yantra is done with ritualistic Shri Sukta Puja Vidhi along with other Vedic Mantra. The detailed Yantra Puja with full rituals can be performed with the help of a learned Pandit only.

However, for simplistic Yantra Puja, one should keep Shri Sukta Yantra at Puja place and perform simple Puja of Shri Sukta Yantra along with Goddess Lakshmi and Lord Ganesha during Diwali Puja. The Shri Sukta hymn should be recited during the Puja. It is believed that the hymn of Shri Sukta has special blessing of Goddess Lakshmi and its Sadhana gives long lasting wealth and prosperity to the worshipper.

 


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October 11, 20191min11180

Grahan 2020: Sun and Lunar Eclipse dates & Time : साल 2019 का आखिरी ग्रहण (grahan) अब शेष रह गया है, जो 26 दिसंबर को पड़ेगा। यह साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी होगा। मतलब 2019 में अब कोई चंद्र ग्रहण शेष नहीं है। आपको याद दिला दें साल 2019 के ग्रहण (grahan) की शुरुआत चंद्र ग्रहण से हुई थी। यह ग्रहण 21 जनवरी को पड़ा था जो करीब साढ़े तीन घंटे तक चला था।

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ध्यान रहे कि पृथ्वी से दो तरह के ग्रहण दिखते हैं। एक है चंद्र ग्रहण और दूसरा है सूर्य ग्रहण। ग्रहण की वैज्ञानिक व्याख्या में समझाया गया है कि जब पृथ्वी सूर्य के बीच चंद्रमा या कोई अन्य ग्रह आता है तो इसे सूर्य ग्रहण कहते हैं। इसी प्रकार चंद्रमा और सूर्य के बीच जब पृथ्वी आती है तो इसे चंद्र ग्रहण कहते हैं।

2020 में पड़ने वाले ग्रहण- (Grahan 2020 dates in india)

चंद्रग्रहण (Chandra Grahan) 
पहला चंद्र ग्रहण 10 जनवरी
दूसरा चंद्र ग्रहण 5 जून
तीसरा चंद्र ग्रहण 5 जुलाई
चौथा चंद्र ग्रहण 30 नंवबर

सूर्य ग्रहण-(Surya Grahan)
पहला सूर्य ग्रहण 21 जून
दूसरा ग्रहण 14 दिसंबर

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हिन्दु धर्म और चन्द्र ग्रहण

हिन्दु धर्म में चन्द्रग्रहण एक धार्मिक घटना है जिसका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। जो चन्द्रग्रहण नग्न आँखों से स्पष्ट दृष्टिगत न हो तो उस चन्द्रग्रहण का धार्मिक महत्व नहीं होता है। मात्र उपच्छाया वाले चन्द्रग्रहण नग्न आँखों से दृष्टिगत नहीं होते हैं इसीलिये उनका पञ्चाङ्ग में समावेश नहीं होता है और कोई भी ग्रहण से सम्बन्धित कर्मकाण्ड नहीं किया जाता है। केवल प्रच्छाया वाले चन्द्रग्रहण, जो कि नग्न आँखों से दृष्टिगत होते हैं, धार्मिक कर्मकाण्डों के लिये विचारणीय होते हैं। सभी परम्परागत पञ्चाङ्ग केवल प्रच्छाया वाले चन्द्रग्रहण को ही सम्मिलित करते हैं।

यदि चन्द्रग्रहण आपके शहर में दर्शनीय नहीं हो परन्तु दूसरे देशों अथवा शहरों में दर्शनीय हो तो कोई भी ग्रहण से सम्बन्धित कर्मकाण्ड नहीं किया जाता है। लेकिन यदि मौसम की वजह से चन्द्रग्रहण दर्शनीय न हो तो ऐसी स्थिति में चन्द्रग्रहण के सूतक का अनुसरण किया जाता है और ग्रहण से सम्बन्धित सभी सावधानियों का पालन किया जाता है।

ग्रहण के लिए मंत्र (Mantra to chant during eclipse)

तमोमय महाभीम सोमसूर्यविमर्दन।
हेमताराप्रदानेन मम शान्तिप्रदो भव॥१॥
Tamomaya Mahabhima Somasuryavimardana।
Hematarapradanena Mama Shantiprado Bhava॥1॥

श्लोक अर्थ – अन्धकाररूप महाभीम चन्द्र-सूर्य का मर्दन करने वाले राहु! सुवर्णतारा दान से मुझे शान्ति प्रदान करें।

विधुन्तुद नमस्तुभ्यं सिंहिकानन्दनाच्युत।
दानेनानेन नागस्य रक्ष मां वेधजाद्भयात्॥२॥
Vidhuntuda Namastubhyam Simhikanandanachyuta।
Danenanena Nagasya Raksha Mam Vedhajadbhayat॥2॥

श्लोक अर्थ – सिंहिकानन्दन (पुत्र), अच्युत! हे विधुन्तुद, नाग के इस दान से ग्रहणजनित भय से मेरी रक्षा करो।


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October 11, 20191min4600

Siddha Kunjika Stotram ( सिद्ध कुंजिका स्तोत्र)  **NEW** || अत्यंत गुप्त और देवों के लिए भी दुर्लभ || Chants Rare For God Also

 

(ज्योतिषाचार्य पंडित भवानी शंकर वैदिक की आवाज़ में प्रस्तुत)

Siddha Kunjika Stotram : सिद्ध कुंजिका स्तोत्र भगवान शिव ने मां पार्वती से इसका उपदेश किया था इसके पाठ मात्र से संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का फल प्राप्त हो जाता है यह अत्यंत गुप्त है और देवों के लिए भी दुर्लभ है. प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित भवानी शंकर वैदिक का कहना है कि यह कुंजिका स्तोत्र मंत्र को जगाने के लिए है किसको किसी भक्ति हीन पुरुष को नहीं देना चाहिए, जो भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ किया करते हैं उनको सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए नहीं तो दुर्गा सप्तशती पाठ का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं होता , इसे आप अपने घर में अपने प्रतिष्ठान में कहीं भी सुन सकते हैं जिससे घर में सुख-समृद्धि और प्रतिष्ठान में ऐश्वर्य वृद्धि प्राप्त होती हैं .

॥सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्॥ Siddha Kunjika Stotram

शिव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत॥१॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥२॥
कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥३॥
गोपनीयं प्रयत्‍‌नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥४॥
॥अथ मन्त्रः॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
॥इति मन्त्रः॥
नमस्ते रूद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि॥१॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि।
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरूष्व मे॥२॥
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका।
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते॥३॥
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी।
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि॥४॥
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्‍‌नी वां वीं वूं वागधीश्‍वरी।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥५॥
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥६॥
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं।
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥७॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा।
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे॥८॥
इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥
यस्तु कुञ्जिकाया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत्।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥
इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे शिवपार्वतीसंवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम्।
॥ॐ तत्सत्॥

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October 10, 20191min5160

इतना आएगा धन (Dhan ) कि मशीन से गिनने पड़ेंगे नोट- शुरू कर दीजिए यह काम करना

Swami Arvind

अगर आपको लगता है कि आपकी लाख कोशिशों के बाद भी धन (Dhan) की परेशानी बनी रहती है। जो इनकम होती है, उससे जरुरतें पूरी नहीं हो रही है तो यह जरुरी उपाय करना शुरू कर दीजिए, इससे धन की कमी नहीं रहेगी.

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