Untitledaa-1280x384.jpg

July 15, 20191min8970

साढेसाती ,राहु, केतु, शनि एवं अन्य कष्ट प्रद ग्रहों को शांत करने का महीना सावन

सावन मास की शुरुआत 17 जुलाई से हो रही है। इस महीने से व्रत और त्योहारों की भी शुरुआत हो जाती है। सावन का महीना शिव की अराधना के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है। भगवान शिव के अलावा यह महीना माता पार्वती की पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त इस महीने में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करते हैं उन्हें भोले बाबा की असीम कृपा मिलती है। सावन का पहला सोमवार 22 जुलाई को होगा।

सावन के महीने में भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाता है। कहते हैं अलग-अलग चीजों से रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इस बार सावन के महीने की खास बात यह है कि इस बार सावन के 4 सोमवार होंगे। सावन का अंतिम दिन 15 अगस्त को है। इस दिन स्वतंत्रतता दिवस के साथ रक्षाबंधन भी है। 

सावन का नाम आते ही मन में रिमझिम बौछारों के साथ ही भगवान शिव की छवि उभरकर आती है। साथ ही विचार आते हैं कि हम ऐसा क्‍या करें कि भगवान शिव प्रसन्‍न हो जाएं और हम पर कृपा बरसाएं।

शिवजी को प्रसन्‍न करने के कुछ आसान से उपाय:-

1-कुंवारी कन्‍याएं शीघ्र विवाह के लिए सावन के महीने में दूध में कुमकुम मिलाकर रोज शिवलिंग पर चढ़ाएं।

2-सावन में नंदी बाबा को रोज हरा चारा खिलाएं। भगवान शिव निश्चित आप पर प्रसन्‍न होंगे और आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

3-रोज सुबह स्‍नान करने के पश्‍चात मंदिर जाएं और यहां शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ बिल्वपत्र,भांग,धतूरा,शमीपत्र तिल इत्यादि से पूजा करें। ऐसा करने से भोले बाबा प्रसन्‍न होते हैं।

इस विधि से करें व्रत, भगवान शिव देंगे ये वरदान

 

सर्वशक्तिमान परम पिता परमात्मा एक है परंतु उसके रुप अनेक हैं। भगवान शिव की शक्ति अपरम्पार है वह सदा ही कल्याण करते हैं। वह विभिन्न रूपों में संसार का संचालन करते हैं। सच्चिदानंद शिव एक हैं, वे गुणातीत और गुणमय हैं। एक ओर जहां ब्रह्म रूप में वह सृष्टि की उत्पत्ति करते हैं वहीं विष्णु रूप में सृष्टि का पालन करते हैं तथा शिव रुप में वह सृष्टि का संहार भी करते हैं। भक्तजन अपनी किसी भी मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान शिव की उपासना करते हुए शिवलिंग का पूजन करते हैं। 

कैसे करें व्रत :-

प्रत्येक सोमवार को मंदिर जाकर शिव परिवार की धूप, दीप, नेवैद्य, फल और फूलों आदि से पूजा करके सारा दिन उपवास करें। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाकर उनका दूध से अभिषेक करें। शाम को मीठे से भोजन करें। अगले दिन भगवान शिव के पूजन के पश्चात यथाशक्ति दान आदि देकर ही व्रत का पारण करें। अपने किए गए संकल्प के अनुसार व्रत करके उनका विधिवत उद्यापन किया जाना चाहिए। जो लोग सच्चे भाव एवं नियम से भगवान की पूजा, स्तुति करते हैं वह मनवांछित फल प्राप्त करते हैं। इन व्रतों में सफेद वस्त्र धारण करके सफेद चन्दन का तिलक लगाकर ही पूजन करना चाहिए तथा सफेद वस्तुओं के दान की ही सर्वाधिक महिमा है। 

दान करने वाली वस्तुएं- बर्फी, सफेद चन्दन, चावल, चांदी, मिश्री, गाय का घी, दूध, दही, खीर, सफेद पुष्पों का दान सायंकाल में करने से जहां मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं वहीं घर में खुशहाली भी आती है।

क्या खांए- खीर ,पूरी, दूध दही, चावल। व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए।

किस मंत्र का करें जाप

 “ओम नम: शिवाय”एवं “महा मृत्युंजय” मंत्र के अतिरिक्त चन्द्र बीज मंत्र ‘ओम श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:’ और चन्द्र मूल मंत्र ‘ओम चं चन्द्रमसे  नम:’।

व्रत से मिलने वाले लाभ- मानसिक सुख एवं शांति का शरीर में प्रवाह होगा। व्यापार में वृद्घि होगी, परिवार में खुशहाली आएगी। जिस कामना से व्रत किया जाऐगा वह अवश्य पूरी होगी।
आप शनि के प्रकोप से पीड़ित हैं तो इस श्रावण माह के प्रथम दिन सच्चे मन से शिव जी से अपनी पीड़ा कहें। इससे वह आपकी पीड़ा जरूर सुनेंगे और उसे दूर करेंगे।

शारीरिक कष्टों से दिलाएंगे मुक्‍ती ;- 

यदि जन्मकुंडली में शनि,राहु,केतु व अन्य कष्टकारी ग्रह शारीरिक कष्ट इत्यादि दे रहे हैं तो आपको सावन के पहले ही दिन से शिव पूजा प्रारंभ कर देनी चाहिए।

शनि की साढ़े साती होगी दूर 

वे लोग जिनकी शनि की साढ़े साती है। या फिर धनु, वृश्चिक और मकर राशि वाले शनि की साढ़े साती से परेशान हैं तो, ऐसे लोग प्रथम दिवस रुद्राभिषेक अवश्य करें और शिवलिंग के सामने बैठकर शनि के बीज मंत्र का जप करें। इसके अलावा उन्‍हें सुंदरकांड का पाठ भी करना चाहिए। 
 

तकनीकी शिक्षा से जुड़े लोग करें महामृत्युंजय मंत्र का जाप :-

शनि से बनने वाले मारकेश की स्थिति में आप महामृत्युंजय मंत्र के जप के साथ साथ शनि के बीज मंत्र का जप भी करें।शनि तकनीकी शिक्षा और विधि की शिक्षा का कारक ग्रह है। इस फील्ड से जुड़े जातक शिव पूजा करें तो उनको सफलता मिलेगी।


आचार्य राजेश कुमार


Vishnu-696x495.png

July 15, 20191min7720

योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु  की पूजा का विधान है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा – अर्चना करने से मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष को पड़ने वाली इस एकादशी के  दिन पीपल की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। अगर आप योगिनी एकादशी के दिन कुछ उपायों को आजमाते हैं। तो न केवल आपके जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाएंगे । बल्कि आप घर में सुख, शांति और धन -धान्य की बरसात भी होगी और अगर आपको इन उपायों के बारे में नहीं पता है। तो आज हम आपको योगिनी एकादशी के सभी उपायों के बारे में बताएंगे ।

योगिनी एकादशी पर धन प्राप्ति के उपाय- व्रत विधि (Yogni Ekadashi ke Upay and vrat vidhi) 

योगनी एकादशी व्रत में स्नान का विशेष प्रावधान है। स्नान करने के लिये मिट्टी का प्रयोग करना शुभ माना जाता है. योगिनी एकादशी के दिन नहाने के पानी में आंवले का रस मिलाकर नहांए। स्नान के लिये तिल के लेप का प्रयोग भी किया जा सकता है। इससे आपको बहुत पुण्य प्राप्त होगा

योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को दूध में केसर मिलाकर अभिषेक कराने से भगवान विष्णु अपने भक्तों पर अतिशीघ्र प्रसन्न होते हैं।

योगिनी एकादशी के दिन दक्षिणावर्ती शंख में गंगा जल भरकर स्नान कराने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

योगिनी एकादशी के दिन विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करने से कुंडली के सभी ग्रह शांत होते हैं।

योगिनी एकादशी के दिन श्री सुक्त का पाठ करने से मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न होती हैं।

योगिनी एकादशी के दिन श्री कृष्ण के मंदिर में जाकर बांसुरी को अच्छी तरह से सजाकर भेंट करने से धन- धान्य में वृद्धि होती है।
योगिनी एकादशी के भगवान विष्णु को पीली चीजों का भोग लगाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा के आगे गीता का पाठ करने से पितरों का आर्शीवाद प्राप्त होता है।

भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के पूरी नहीं होती। इसलिए भगवान विष्णु को तुलसी अवश्य चढ़ांए।

योगिनी एकादशी के दिन चावल का बिल्कुल भी सेवन न करें नहीं तो आपको भगवान विष्णु के क्रोध का पात्र बनना पड़ेगा।

भारतीय धर्म ग्रन्थों व पुराणों के अनुसार प्रमाणित रूप से मिलता है कि आषाढ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन योगिनी एकादशी व्रत का  विशेष विधान है। इस दिन आस्था रखने वाला व्यक्ति प्रात: काल स्नान आदि कार्यो के बाद, व्रत का संकल्प लेते हैं। इस व्रत के करने से अट्ठासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस व्रत के पुण्य से मनुष्य के सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। यह एकादशी मनुष्य को लोक तथा परलोक, दोनों लोक में मुक्ति दिलाता है। यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध एकादशी व्रत है . इस दिन कलस स्थापना की जाती है  और कलस के ऊपर भगवान विष्णु जी कि प्रतिमा रख कर पूजा की जाती है और पंचोपचार विधि से पूजा कर धूप, दीप  नैवेद्य चढ़ाया जाता है। व्रत की रात्रि में जागरण किया जाता है और भगवान विष्णु अनेकों प्रकार का भोग लगा कर उनको प्रसन्न किया जाता है। ‘योगिनी’ महा पापों को शांत करने वाली और महान पुण्य-फल देनेवाली है। योगनी एकादशी की कथा पढ़ने और सुनने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है।

योगिनी एकादशी व्रत कथा ( Yogni Ekadashi Vrat Katha)

योगिनी एकादशी व्रत  के बारे में प्रमाणित अनेकों पौराणिक  कथाएं विद्यमान है  एक प्रचलित कथा के अनुसार बताते हैं कि एक बार एक अलकापुरी नाम की नगरी में एक कुबेर नाम का राजा था वह राजा भगवान शिव का अनन्य भक्त था और वह राजा नित्य प्रतिदिन भगवान शिव पर  ताजे फल-फूल अर्पित   करता था. जो माली उसके लिए पुष्प लाया करता था उसका नाम हेम था हेम माली अपनी पत्नि विशालाक्षी के साथ सुख पूर्वक जीवन व्यतीत कर रहा था. एक दिन हेममाली पूजा कार्य में न लग कर, अपनी स्त्री के साथ रमण करने लगा. जब राजा कुबेर को उसकी राह देखते-देखते दोपहर हो गई तो उसने क्रोधपूर्वक अपने सेवकों को हेममाली का पता लगाने की आज्ञा दी। जब सेवकों ने उसका पता लगाया, तो वह कुबेर के पास जाकर कहने लगे, हे राजन, वह माली अभी तक अपनी स्त्री के साथ रत्ती क्रिया में मुग्ध है। इस बात को सुनते ही राजा ने माली को बुलाने आदेश दिया। डर से काँपता हुआ माली राजा के समक्ष  उपस्थित हुआ। माली को  देखते ही राजा अत्यन्त क्रोधित हुआ और राजा के होंठ फड़फड़ाने लगे।

राजा ने कहा- ‘अरे अधम! तूने मेरे परम पूजनीय देवों के भी देव भगवान शिवजी का अपमान किया है। मैं तुझे शाप (श्राप) देता हूँ कि तू स्त्री के वियोग में तड़पे और मृत्युलोक में जाकर कोढ़ी का जीवन व्यतीत करे।’ कुबेर के शाप (श्राप) से वह तत्क्षण स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरा और कोढ़ी हो गया। उसकी स्त्री भी उससे बिछड़ गई। मृत्युलोक में आकर उसने अनेक भयंकर कष्ट भोगे, किन्तु शिव की कृपा से उसकी बुद्धि मलिन न हुई और उसे पूर्व जन्म की भी सुध रही। अनेक कष्टों को भोगता हुआ तथा अपने पूर्व जन्म के कुकर्मो को याद करता हुआ वह हिमालय पर्वत की तरफ चल पड़ा।  चलते-चलते मार्ग पर माली को एक ऋषि का आश्रम मिला जो की मार्कण्डेय ऋषि का आश्रम था वहां पहुँचते है  माली उस आश्रम में प्रवेश कर वृद्ध ऋषि से मिलता है और उनको दंडवत प्रणाम करता है। अचानक ऋषि महाराज जी बोलते है हे वत्स ऐसा क्या कार्य किया जो आप भटक रहे हो और तब माली ने अपनी साडी व्यथा सुना कर ऋषि से सदगति का मार्ग पूछने लगा मार्कण्डेय ऋषि द्वारा बताये गए मार्ग पर माली आगे बढ़ा व उसने योगनी एकादशी का व्रत रखना प्रारम्भ किया विधि विधान से किया व्रत माली का सफल हुआ और वह फिर से अपने पुराने रुप में वापस आ गया और अपनी स्त्री के साथ प्रसन्न पूर्वक रहने लगा।


chandra-grahan-dtv.jpg

July 15, 20198min4870

इस बार चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) और गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) पर्व एक साथ होगा। गुरु पूर्णिमा पर यह लगातार दूसरे वर्ष चंद्रग्रहण लग रहा है। चन्द्रग्रहण (lunar eclipse) भारत में दिखाई देगा। इससे पहले 2018 में 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर ही खण्डग्रास चंद्रग्रहण था। गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण एक साथ होने पर गुरु पूजा का कार्यक्रम भी सूतक लगने से पहले तक ही होंगे।

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार 16 जुलाई 2019 को लगने वाला चन्द्रग्रहण भारत में दिखाई देगा। ये खण्डग्रास चन्द्रग्रहण रहेगा। भारत में ये ग्रहण 16-17  जुलाई की रात लगभग 1 बजकर 31 मिनट पर शुरू हो जाएगा। ग्रहण का मध्य समय रात 3 बजकर 1 मिनट रहेगा और सुबह लगभग 4 बजकर 30 मिनट पर ग्रहण खत्म हो जाएगा। सम्पूर्ण ग्रहण की अवधि 2 घण्टा 59 मिनट है। चन्द्र ग्रहण में ग्रहण प्रारंभ होने से 9 घंटे पहले सूतक होता है। जो कि 16 जुलाई को दिन में लगभग 4:30 शुरू हो जाएगा और ग्रहण के साथ ही खत्म हो जाएगा।

इस दिन गुरु पूर्णिमा उत्सव, गुरु पूजन और अन्य शुभ काम सूतक काल यानी शाम लगभग 4:30 से पहले ही कर लेने चाहिए।
 

गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण एक साथ


इस बार चंद्र ग्रहण और गुरु पूर्णिमा पर्व एक साथ होगा।  गुरु पूर्णिमा पर यह लगातार दूसरे वर्ष चंद्रग्रहण लग रह है। इससे पहले 2018 में 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर ही खग्रास चंद्रग्रहण था। पहले इस ग्रहण की अवधि  3 घंटे 51 मिनट थी। इस बार ग्रहण की अवधि 2.59 मिनट रहेगी।  गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण एक साथ होने पर गुरु पूजा का कार्यक्रम भी सूतक लगने से पहले तक ही होंगे। 

कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण

भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, एशिया (उत्तरपूर्वी भाग को छोड़ कर), अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के अधिकांश भाग में दिखाई देगा। ( स्कैनडिनाविया के अधिकांश भाग को छोड़ कर)
चन्द्रास्त के समय ग्रहण का प्रारम्भ न्यूजीलैण्ड के कुछ भाग, ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी भाग, उत्तर तथा दक्षिण कोरिया, चीन के उत्तरी भाग तथा रूस के कुछ भाग में दिखाई देगा। चन्द्रोदय के समय ग्रहण का अन्त अर्जेन्टिना, चिली, बोलीविया, ब्राजील के पश्चिमी भाग, पेरु तथा, उत्तरी अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा।

ग्रहण के समय नहीं करना चाहिए ये काम

 ग्रहण की अवधि में तेल लगाना भोजन करना, जल पीना, सोना, केश विन्यास करना, रति क्रीडा करना, मंजन करना, वस्त्र नीचोड़्ना, ताला खोलना, वर्जित किए गये हैं
 ग्रहण के समय सोने से रोग बढ़ते हैं, मल त्यागने से पेट में कृमि रोग होने की संभावना बढ़ती है, संभोग नहीं करना चाहिए। मालिश या उबटन भी नहीं करना चाहिए।
देवी भागवत में लिखा है कि सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य पेट के रोगों से परेशान रहता है। ऐसे मनुष्य को आंख और दांत के रोग भी होते हैं। 
  चंद्रग्रहण में तीन प्रहर पहले भोजन कर लेना चाहिए (1 प्रहर यानी 3 घंटे) बूढ़े, बालक और रोगी एक प्रहर पहले खा सकते हैं
 ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ना चाहिए।
स्कंद पुराण के अनुसार ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से पुण्य नष्ट हो जाता है
ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

ग्रहण काल में क्या कर सकते हैं (chandra grahan se bachne ke upay)

 ग्रहण लगने से पूर्व स्नान करके भगवान का पूजन, यज्ञ, जप करना चाहिए
 चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्य ग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है।
ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवाना के नामों का जप जरूर करें। 
 ग्रहण समाप्त हो जाने पर स्नान करके श्रद्धा के अनुसार ब्राम्हण को दान देना चाहिए
ग्रहण के बाद पुराना पानी, अन्न नष्ट कर नया भोजन पकाया जाता है और ताजा जल भरना चाहिए।
ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।
ग्रहणकाल में स्पर्श किए हुए वस्त्र आदि की शुद्धि के लिए बाद में उसे धो देना चाहिए तथा खुद भी वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए।
ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरत मंदों को वस्त्र् दान देने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।
 

गर्भवती महिलाओं को ध्यान रखनी चाहिए ये बातें  (chandra grahan 2019 pregnancy effect)

गर्भवती स्त्री को सूर्यचन्द्रग्रहण नहीं देखना चाहिए, क्योकि उसके दुष्प्रभाव से शिशु अंगहीन होकर विकलांग बन जाता है गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है।
chandra grahan 2019 for pregnant ladies
इससे बचने के लिए गर्भवती के उदर भाग यानी पेट पर गोबर और तुलसी का लेप लगा दिया जाता है, जिससे कि राहु केतु उसका स्पर्श न करें। 
ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्री को कुछ भी कैंची, चाकू आदि से काटने को मना किया जाता है, और किसी वस्त्र आदि को सिलने से मना किया जाता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंग या तो कट जाते हैं या फिर सिल (जुड़) जाते हैं
 
इन 8 राशियों पर रहेगा अशुभ असर (chandra grahan 2019 effects on rashi)
 
 मेष, वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु और मकर राशि वाले लोगों पर इस ग्रहण का अशुभ असर रहेगा। इन 8 राशि वाले लोगों को संभलकर रहना चाहिए। कर्क, तुला, कुंभ और मीन राशि वाले लोगों पर इस चंद्रग्रहण का अशुभ असर नहीं पड़ेगा। 

Untitledaav-1-1280x384.jpg

July 15, 20191min13420

गुप्त नवरात्री (Gupt Navratri 2019) जानिए गुप्त मन्त्र और उपाय, 10 महाविद्याओं की पूजा विधि

शारदीय नवरात्री के वक्त शक्ति की प्रतीक माँ दुर्गा की अाराधना जोर-शोर से की जाती है। हालांकि चैत्र नवरात्री में भी देवी की अराधना बड़े पैमाने पर होती है। क्या अापको पता है कि साल भर में शारदीय और चैत्र नवरात्री के अलावा दो और नवरात्री सहित कुल चार नवरात्र होते हैं। अगर नहीं तो हम अापको बताते हैं। इन दोनों के अलावा दो गुप्त नवरात्री होते हैं। पहले इसके बारे में कम ही लोगों को पता था, लेकिन अब लोग इसके बारे में भी जानने लगे हैं।   महाकाल संहिता और तमाम शाक्त ग्रंथों में इन चारों नवरात्रों का महत्व बताया गया है. इनमे विशेष तरह की इच्छा की पूर्ति तथा सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूजा और अनुष्ठान किया जाता है.

गुप्त नवरात्री में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्री में माता काली के गुप्त स्वरूप की पूजा करने का विधान है। साधक मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।गुप्त नवरात्री में नौ दिनों तक उपवास रखने का विधान बताया गया है। गुप्त नवरात्री में पूजा रात में की जाती है।

गुप्त नवरात्री का महत्व (Importance of Gupt Navratri )

गुप्त नवरात्री में बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना की जाती है। गुप्त नवरात्री को तांत्रिक सिद्धियों की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। पूरे नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है। नौ दिन व्रत रखने वाले साधकों को काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए। नमक एवं अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। दिन में सोना नहीं चाहिए। किसी को भी अपशब्द नहीं बोलना चाहिए। नारी का अपमान नहीं करना चाहिए। नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशति का पाठ करना चाहिए।

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक गुप्त नवरात्री (Gupta Navratri) साल में 2 बार आते हैं एक माघ महीने में और दूसरा आषाढ़ महीने में। वर्ष 2019 में गुप्त नवरात्री  जुलाई (आषाढ़ मास में) और फरवरी (माघ मास में ) में थी. गुप्त नवरात्री को तांत्रिक सिद्धियों की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। गुप्त नवरात्री की पूजा के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। ये दस महाविद्याएं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी हैं। 

क्या अंतर है सामान्य और गुप्त नवरात्री में? (Difference between normal and Gupt Navaratri)

सामान्य नवरात्री में आमतौर पर सात्विक और तांत्रिक पूजा दोनों की जाती है.
वहीं गुप्त नवरात्री में ज्यादातर तांत्रिक पूजा की जाती है.
गुप्त नवरात्री में आमतौर पर ज्यादा प्रचार प्रसार नहीं किया जाता, अपनी साधना को गोपनीय रखा जाता है .
गुप्त नवरात्री में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होगी, सफलता उतनी ही ज्यादा मिलेगी.

क्या होगी गुप्त नवरात्री में मां की पूजा विधि ? (Gupt Navratri 2019 Puja Vidhi )

नौ दिनों के लिए कलश की स्थापना की जा सकती है.
अगर कलश की स्थापना की है तो दोनों वेला मंत्र जाप,चालीसा या सप्तशती का पाठ करना चाहिए.
 दोनों ही समय आरती भी करना अच्छा होगा .

 मां को दोनों वेला भोग भी लगाएं, सबसे सरल और उत्तम भोग है लौंग और बताशा.
 मां के लिए लाल फूल सर्वोत्तम होता है पर मां को आक, मदार, दूब और तुलसी बिलकुल न चढ़ाएं.
 पूरे नौ दिन अपना खान पान और आहार सात्विक रखें.
गुप्त नवरात्री एक बहुत महत्वपूर्ण एवं तुरंत फलदायक पर्व हैं, कोई श्रद्धालु यदि इन मंत्रों में से किसी एक को भी अपने गुप्त उद्देश्यों अथवा इच्छाओ की प्राप्ति के लिए सच्चे मन से मन्त्र जप करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं बहुत जल्द पूरी हो जाती है।

गुप्त नवरात्री के गुप्त मन्त्र और उपाय ( Gupt Mantra and Upay)

 

गुप्त नवरात्री विशेष रूप से फलदायक एवं उपयोगी है। इस नवरात्रि इन मंत्रों का जप करने से भक्त लाभान्वित होते है और उनकी समस्याओ का सामाधान हो जाता है। यदि आपके अपने पति / पत्नी के साथ मतभेद हैं, तो एक मंत्र है जो आपके मतभेदों को खत्म करने का कार्य करता हैं। इस मंत्र का जप करने के बाद, आपको निश्चित रूप से लाभ होगा। यह मंत्र है सब नार करहि परस्पर प्रीति चलहि स्वधर्म नीरत श्रुति नीति । इस मंत्र का जप करने का अभ्यास करते समय आपको घी की 108 आहुति देनी होती है। सुबह, प्रातःकाल 21 बार इस मंत्र का जप करना चाहिए।
 
 यदि आप अपने बच्चे की बुरी नजर से रक्षा करना चाहते हैं, तो आपको हनुमान चालिसा के श्लोकों का जप करना चाहिए और अपने बाएं पैर के साथ बच्चे के माथे पर सिंदूर लगाना चाहिए।
 
 यदि आप बेरोजगार हैं और रोजगार की तलाश कर रहे है तो भक्त को भैरव बाबा मंदिर में प्रार्थना करनी चाहिए। यह आपकी नौकरी प्राप्ति में निश्चित रूप से सहायता करेगा।
 
 आर्थिक लाभ के लिए, 9 दिनों तक पीपल पेड़ के पत्ते पर राम का नाम लिखें और उन्हें हनुमान मंदिर में अर्पित करे, इससे आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो जायेगा।
 
 स्वस्थ रहने के लिए, 108 बार निम्नलिखित मंत्र का जप करें। यह आपकी अनेक बीमारियों को दूर कर स्वस्थ होने में सहायता करता है और आपका परिवार भी स्वस्थ रहता है। यह मंत्र है ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा श्यामा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।
 
 अगर आपकी शादी में कोई समस्या उत्पन्न हो रही है, तो अपने मंदिर में शिव-पार्वती की एक मूर्ति स्थापित करे और प्रार्थना के बाद, निम्नलिखित मंत्र का 5 बार जाप करें। ॐ शंकराय सकल जन्मार्जित पाप विध्वंशनाय, पुरुषार्थ चतुष्ठाय लभाय च पति म देहि कुरु कुरु स्वहा।
 
अब, आप समझ सकते हैं कि गुप्त नवरात्रि हिंदुओं के महत्वपूर्ण धार्मिक त्यौहार में से एक है। यह हिन्दू सभ्यता के अनुसार बहुत शुभ माना जाता है। लोगों को पौराणकि समय से इसमें आस्था और विश्वास है। मुख्या रूप से, यह देवी माँ शक्ति को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है ताकि जीवन में कोई तनाव न हो। यहां तक कि यदि आपकी कुछ समस्याएं हैं, तो आप किसी विशेष समस्या के लिए विशेष मंत्रों का जप करके उन समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।


asasas1-1280x380.jpg

July 14, 20195min4100

17 जुलाई  से श्रावण मास आरंभ, बनेंगे कई शुभ और बड़े संयोग 

 इस साल  भगवान भोलेनाथ शिव का महीना सावन  (Shravan Month 2019) 17 जुलाई से आरंभ हो रहा है। इस बार इस माह में कई विशेष शुभ संयोग बनेंगे। 17 जुलाई को सूर्य प्रधान उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से सावन माह की शुरुआत हो रही है। इस दिन वज्र और विष कुंभ योग भी बन रहा है।

नागपंचमी (Nag Panchami 2019)

 नागपंचमी (Nag Panchami ) का शुभ पर्व भगवान शिव के विशेष दिन सोमवार को आ रहा है। सोमवार और नागपंचमी दोनों ही दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है, इसलिए इस बार नागपंचमी का विशेष महत्व है।
नागपंचमी के दिन चंद्र प्रधान हस्त नक्षत्र और त्रियोग का संयोग भी बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग, सिद्धि योग और रवि योग अर्थात त्रियोग के संयोग में काल सर्प दोष निवारण के लिए पूजा करना फलदायी होगा।
इस बार पूरे 30 दिन का सावन है और इस दौरान 4 सोमवार आएंगे। इसमें तीसरे सोमवार को त्रियोग का संयोग बन रहा है जो विशेष फलदायी होगा।
श्रावण मास के ग्रह नक्षत्र संकेत दे रहे हैं कि इस बार खंड वर्षा होगी। देश के अनेक इलाकों में रुकरुककर बरखा होगी। कहीं बहुत ज्यादा तो कहीं कम बारिश होगी। 20 जुलाई को शुक्र ग्रह अस्त हो रहा है जो 22 सितंबर तक रहेगा। इस दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य करना निषेध है।

हरियाली अमावस्या (Hariyali Amavasya 2019)

125 सालों बाद हरियाली अमावस्या (Hariyali Amavasya 2019) पर पंच महायोग का संयोग है। एक अगस्त को हरियाली अमावस्या पर इस दिन पहला सिद्धि योग, दूसरा शुभ योग, तीसरा गुरु पुष्यामृत योग, चौथा सर्वार्थ सिद्धि योग और पांचवां अमृत सिद्धि योग का संयोग है। पंच महायोग के संयोग में कुल देवीदेवता तथा मां पार्वती की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।
कई सालों बाद 15 अगस्त को चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का संयोग बन रहा है। रक्षाबंधन के दिन राष्ट्रीय पर्व होने से देश भर में विशेष उमंग और उत्साह का वातावरण होगा। राखियां भी तिरंगे की ही मिलेगी। स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन की रात्रि नौ बजे के बाद पंचक शुरू हो रहा है इसलिए इससे पूर्व राखी बंधवाना श्रेष्ठ होगा।

आइये अब  है नज़र डालते हैं श्रावण मास की प्रमुख तिथियों पर (beginning of sawan month 2019)

 सावन सोमवार व्रत (Sawan Somlar Vrat 2019)

बुधवार, 17 जुलाई श्रावण मास का पहला दिन
सोमवार, 22 जुलाई सावन सोमवार व्रत
सोमवार, 29 जुलाई सावन सोमवार व्रत
सोमवार, 05 अगस्त सावन सोमवार व्रत
सोमवार, 12 अगस्त सावन सोमवार व्रत
गुरुवार, 15 अगस्त श्रावण मास का अंतिम दिन
ऐसा कहा जाता है कि श्रवण महीना भगवान शिव का पसंदीदा महीना है। उनके पसंदीदा अवसर पर उनकी पूजा करना, आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करेगा . इस महीने को बेहद शुभ माना जाता है और जो लोग इस दिन महा उपवास का पालन करते हैं, वे अपने सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं।

ccc-e1553705279935.png

March 27, 20193min24400

2019 Hindu Calendar : Vrat and Festival List महत्वपूर्ण व्रत-त्यौहार की लिस्ट 

2019 Hindu Calendar इस साल जनवरी महीना सफला एकादशी के साथ शुरू हुआ था वहीं साल का आखिरी महीना मासिक शिवरात्रि के साथ खत्‍म होगा। इस पूरे वर्ष कई त्‍योहार और व्रत महत्‍वपूर्ण हैं। चुंकि भारत देश त्‍योहारों और परंपराओं का देश है, तो हर त्‍योहार का अपना महत्‍व है।  साल 2019 में कई बड़े-बड़े व्रत और त्‍योहार आएंगे। अगर आपको इन सभी पर्व की सटीक जानकारी प्राप्‍त करनी है तो यहां पढ़ें 2019 का पूरा कैलेंडर। यह कैलेंडर वैदिक ज्योतिष पर आधारित है। साल 2019 में कौन सा त्योहार कब पड़ रहा है इसकी पूरी सूची यहां दी गई है…

2019 Hindu Calendar

जनवरी 2019  त्यौहार 

  • 1 मंगलवार    सफला एकादशी
  • 3 गुरुवार    प्रदोष व्रत (कृष्ण)
  • 4 शुक्रवार    मासिक शिवरात्रि
  • 5 शनिवार    मार्गशीर्ष अमावस्या
  • 15 मंगलवार    पोंगल , उत्तरायण , मकर संक्रांति
  • 17 गुरुवार    पौष पुत्रदा एकादशी
  • 18 शुक्रवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 21 सोमवार    पौष पूर्णिमा व्रत
  • 24 गुरुवार    संकष्टी चतुर्थी
  • 31 गुरुवार    षटतिला एकादशी

फरवरी 2019    त्यौहार

  • 2 शनिवार    प्रदोष व्रत (कृष्ण) , मासिक शिवरात्रि
  • 4 सोमवार    पौष अमावस्या
  • 10 रविवार    बसंत पंचमी , सरस्वती पूजा
  • 13 बुधवार    कुम्भ संक्रांति
  • 16 शनिवार    जया एकादशी
  • 17 रविवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 19 मंगलवार    माघ पूर्णिमा व्रत
  • 22 शुक्रवार    संकष्टी चतुर्थी

मार्च 2019    त्यौहार

  • 2 शनिवार    विजया एकादशी
  • 3 रविवार    प्रदोष व्रत (कृष्ण)
  • 4 सोमवार    महाशिवरात्रि , मासिक शिवरात्रि
  • 6 बुधवार    माघ अमावस्या
  • 15 शुक्रवार    मीन संक्रांति
  • 17 रविवार    आमलकी एकादशी
  • 18 सोमवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 20 बुधवार    होलिका दहन
  • 21 गुरुवार    होली , फाल्गुन पूर्णिमा व्रत
  • 24 रविवार    संकष्टी चतुर्थी
  • 31 रविवार    पापमोचिनी एकादशी

अप्रैल 2019    त्यौहार

  • 2 मंगलवार    प्रदोष व्रत (कृष्ण)
  • 3 बुधवार    मासिक शिवरात्रि
  • 5 शुक्रवार    फाल्गुन अमावस्या
  • 6 शनिवार    चैत्र नवरात्रि , उगाडी , घटस्थापना , गुड़ी पड़वा
  • 7 रविवार    चेटी चंड
  • 13 शनिवार    राम नवमी
  • 14 रविवार    चैत्र नवरात्रि पारणा , मेष संक्रांति
  • 15 सोमवार    कामदा एकादशी
  • 17 बुधवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 19 शुक्रवार    हनुमान जयंती , चैत्र पूर्णिमा व्रत
  • 22 सोमवार    संकष्टी चतुर्थी
  • 30 मंगलवार    वरुथिनी एकादशी

मई 2019    त्यौहार

  • 2 गुरुवार    प्रदोष व्रत (कृष्ण)
  • 3 शुक्रवार    मासिक शिवरात्रि
  • 4 शनिवार    चैत्र अमावस्या
  • 7 मंगलवार    अक्षय तृतीया
  • 15 बुधवार    मोहिनी एकादशी , वृष संक्रांति
  • 16 गुरुवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 18 शनिवार    वैशाख पूर्णिमा व्रत
  • 22 बुधवार    संकष्टी चतुर्थी
  • 30 गुरुवार    अपरा एकादशी
  • 31 शुक्रवार    प्रदोष व्रत (कृष्ण)

जून 2019    त्यौहार

  • 1 शनिवार    मासिक शिवरात्रि
  • 3 सोमवार    वैशाख अमावस्या
  • 13 गुरुवार    निर्जला एकादशी
  • 14 शुक्रवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 15 शनिवार    मिथुन संक्रांति
  • 17 सोमवार    ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत
  • 20 गुरुवार    संकष्टी चतुर्थी
  • 29 शनिवार    योगिनी एकादशी
  • 30 रविवार    प्रदोष व्रत (कृष्ण)

जुलाई 2019    त्यौहार

  • 1 सोमवार    मासिक शिवरात्रि
  • 2 मंगलवार    ज्येष्ठ अमावस्या
  • 4 गुरुवार    जगन्नाथ रथ यात्रा
  • 12 शुक्रवार    देवशयनी एकादशी , अषाढ़ी एकादशी
  • 14 रविवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 16 मंगलवार    गुरु-पूर्णिमा , आषाढ़ पूर्णिमा व्रत , कर्क संक्रांति
  • 20 शनिवार    संकष्टी चतुर्थी
  • 28 रविवार    कामिका एकादशी
  • 29 सोमवार    प्रदोष व्रत (कृष्ण)
  • 30 मंगलवार    मासिक शिवरात्रि

अगस्त 2019    त्यौहार

  • 1 गुरुवार    आषाढ़ अमावस्या
  • 3 शनिवार    हरियाली तीज
  • 5 सोमवार    नाग पंचमी
  • 11 रविवार    श्रावण पुत्रदा एकादशी
  • 12 सोमवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 15 गुरुवार    रक्षा बंधन , श्रावण पूर्णिमा व्रत
  • 17 शनिवार    सिंह संक्रांति
  • 18 रविवार    कजरी तीज
  • 19 सोमवार    संकष्टी चतुर्थी
  • 24 शनिवार    जन्माष्टमी
  • 26 सोमवार    अजा एकादशी
  • 28 बुधवार    मासिक शिवरात्रि , प्रदोष व्रत (कृष्ण)
  • 30 शुक्रवार    श्रावण अमावस्या

सितंबर 2019    त्यौहार

  • 1 रविवार    हरतालिका तीज
  • 2 सोमवार    गणेश चतुर्थी
  • 9 सोमवार    परिवर्तिनी एकादशी
  • 11 बुधवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल) , ओणम/थिरुवोणम
  • 12 गुरुवार    अनंत चतुर्दशी
  • 14 शनिवार    भाद्रपद पूर्णिमा व्रत
  • 17 मंगलवार    संकष्टी चतुर्थी , कन्या संक्रांति
  • 25 बुधवार    इन्दिरा एकादशी
  • 26 गुरुवार    प्रदोष व्रत (कृष्ण)
  • 27 शुक्रवार    मासिक शिवरात्रि
  • 28 शनिवार    भाद्रपद अमावस्या
  • 29 रविवार    शरद नवरात्रि , घटस्थापना

अक्टूबर 2019    त्यौहार

  • 4 शुक्रवार    कल्परम्भ
  • 5 शनिवार    नवपत्रिका पूजा
  • 6 रविवार    दुर्गा महा नवमी पूजा , दुर्गा महा अष्टमी पूजा
  • 7 सोमवार    शरद नवरात्रि पारणा
  • 8 मंगलवार    दुर्गा विसर्जन , दशहरा
  • 9 बुधवार    पापांकुशा एकादशी
  • 11 शुक्रवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 13 रविवार    अश्विन पूर्णिमा व्रत
  • 17 गुरुवार    संकष्टी चतुर्थी , करवा चौथ
  • 18 शुक्रवार    तुला संक्रांति
  • 24 गुरुवार    रमा एकादशी
  • 25 शुक्रवार    धनतेरस , प्रदोष व्रत (कृष्ण)
  • 26 शनिवार    मासिक शिवरात्रि
  • 27 रविवार    दिवाली , नरक चतुर्दशी
  • 28 सोमवार    गोवर्धन पूजा , अश्विन अमावस्या
  • 29 मंगलवार    भाई दूज

नवंबर 2019    त्यौहार

  • 8 शुक्रवार    देवुत्थान एकादशी
  • 9 शनिवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 12 मंगलवार    कार्तिक पूर्णिमा व्रत
  • 16 शनिवार    संकष्टी चतुर्थी
  • 17 रविवार    वृश्चिक संक्रांति
  • 22 शुक्रवार    उत्पन्ना एकादशी
  • 24 रविवार    प्रदोष व्रत (कृष्ण)
  • 25 सोमवार    मासिक शिवरात्रि
  • 26 मंगलवार    कार्तिक अमावस्या

दिसंबर 2019    त्यौहार

  • 8 रविवार    मोक्षदा एकादशी
  • 9 सोमवार    प्रदोष व्रत (शुक्ल)
  • 12 गुरुवार    मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत
  • 15 रविवार    संकष्टी चतुर्थी
  • 16 सोमवार    धनु संक्रांति
  • 22 रविवार    सफला एकादशी
  • 23 सोमवार    प्रदोष व्रत (कृष्ण)
  • 24 मंगलवार    मासिक शिवरात्रि
  • 26 गुरुवार    मार्गशीर्ष अमावस्या

thanks-to-all-1280x720.jpg

March 27, 20191min9780

कहीं आप से कोई ग्रह नाराज़ तो नहीं,ऐसे करें नवग्रहों को प्रसन्न

जिनके ग्रह नक्षत्र ख़राब हों, वे ऐसे करें शिव की पूजा,मिलेगा नवग्रहों का साथ

भगवान भोलेशंकर का पूजन तो सभी करते हैं, लेकिन उनके विविध रूपों का पूजन करने पर अनेक प्रकार की परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

आइए जानें कैसे करें शिव का पूजन की नवग्रह प्रसन्न हो

सूर्य एवं मंगल

इन दो ग्रहों से पीड़ित लोगों को अनार के रस से वैद्यनाथ और अमरनाथ का अभिषेक करना लाभकारी होता है। अनार के फल का भोग भी लगाना चाहिए तथा गुड़ मिश्रित हवन करना चाहिए।

बुध

इस ग्रह से परेशान लोगों को विश्वनाथ भगवान का बेलपत्रों से पूजन करना चाहिए। चने के पौधों, गेहूं की हरी बालियों से भगवान का हरा श्रृंगार करना चाहिए। पूजन के उपरांत पान अवश्य अर्पित करना चाहिए।

चंद्र

इस ग्रह के कमजोर होने पर व्यक्ति को गाय के दूध से रामेश्वर का अभिषेक कर खीर का भोग लगाना चाहिए।

गुरु

इस ग्रह को मजबूत बनाने के लिए ओंकारेश्वर भगवान का पूजन करके पीले पुष्पों का श्रृंगार करना चाहिए। तथा शिव पंचाक्षरी मंत्र का 11 माला जाप करें।

शुक्र

इस ग्रह से पीड़ित लोगों को भीमाशंकर भगवान का पूजन करके इत्र स्नान कराना चाहिए। चावल और दूध का दान करना चाहिए।

शनि

इससे पीड़ित लोगों को महाकाल का तेल से अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक किए गए तेल को दान कर देना चाहिए। भगवान शिव की आराधना से शनिदेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं। शनि बाधा के निवारणार्थ महामृत्युंजय मंत्र की 11 माला का जाप करना चाहिए। इससे आकस्मिक दुर्घटना, भय, शोक का निवारण होगा। शमी पत्र चढ़ाना चाहिए।

राहू एवं केतु

ग्रह से पीड़ित लोगों को शिवलिंग पर रूद्रपाठ करते हुए जल अथवा दूध लेकर भांग या धतूरे को जल में अथवा दूध में मिलाकर अभिषेक करना चाहिए।


RTX3EXMV.jpeg

March 27, 20191min5920

ज्योतिषियों का कहना है कि मोदी की जन्मतिथि और कुंडली को लेकर भ्रम की जो स्थिति बनी उसकी वजह से परिणाम गणना में दिक्कतें आई हैं। विशेषकर प्रधानमंत्री मोदी की जन्मकुंडली को लेकर कई तरह के भ्रम और भ्रांतियां हैं कांग्रेस ने उनकी जन्मतिथि में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया था। उस लिहाज से प्रधानमंत्री के सितारों की पड़ताल में दिक्कतें आ रही हैं।

(आचार्य राजेश कुमार)
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्तिसिंह गोहिल ने कहा, ‘एमएन कॉलेज के छात्र रजिस्टर (जिसमें मोदी ने प्री-साइंस यानी 12वीं में दाखिला लिया था) में श्री नरेंद्र मोदी की जन्मतिथि 29 अगस्त, 1949 है। उनके चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी जन्मतिथि नहीं बताई है बल्कि अपनी उम्र लिखी है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध उनकीऔपचारिक जन्म तिथि 17 सितंबर, 1950 है।’

उन्होंने स्कूल रजिस्टर की प्रति दिखाई, जिसमें प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्रकुमार दामोदरदास मोदी और उनकी उक्त जन्मतिथि लिखी है. मोदी जी के वाह्य एवं आतंरिक व्यक्तित्व,क्रियाकलापों, उनके भाषण,पारिवारिक परिस्थितियों एवं विगत लगभगदो दशकों से प्रदेश एवं देश की सत्ता में रहकर किए गए कार्यों के आधार पर गहन अध्ययन एवं ज्योतिषीय विश्लेषण के पश्चात् प्राप्त वास्तविक जन्म तिथि 17 सितंबर1949, जन्म समय सुबह 10.55, जन्मस्थान वडनगर,गुजरात के होने की संभावना ज्यादा है।

इस जन्मतिथि के आधार पर प्राप्त विवरण से पूर्व मोदी जी के बहुचर्चित जन्मतिथि सितंबर 17, 1950, जन्मसमय 11 बजे से प्राप्त विवरण को समझना जरुरी है।

श्री गणेश का लोकप्रिय संकटनाशन स्तोत्र, इसका 11 बार जप बनाता है अमीर

जानिए क्या कहती है नरेन्द्र मोदी की बहुचर्चित जन्म कुंडली (दिनांक सितंबर 17, 1950, जन्म समय 11 बजे की)

सितंबर 17, 1950, जन्म समय 11 बजे, मेहसाणा-गुजरात, के अनुसार उनका जन्म लग्न वृश्चिक है और जन्म कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को विष्कुम्भ योग में हुआ है। विष्कुम्भ में जन्मा हुआ जातक कभी इतना उत्थान नहीं कर सकता।
1. वृश्चिक लग्न में मंगल तो है परन्तु शुन्य अंश का है साथ में नीच का चन्द्रमा है, जिसके चलते रूचक और विष्णु लक्ष्मी योग तो बनते हैं परन्तु बहुत ही कमजोर, कम से कम इतने शक्तिशाली तो नहीं जितने मोदी के दिखाई दे रहे हैं।
2. वृश्चिक लग्न में दशम भाव का मालिक सूर्य है जो स्वयं एकादश भाव में केतु के साथ ग्रहण योग में बैठा है और दशम भाव में शत्रु के स्थान पर शनि विराजमान है
जो कभी भी इतना तगड़ा राजयोग नहीं दे सकता बल्कि हमेशा अवरोध उत्पन्न करेगा। जबकि मोदी का पिछला जीवन देखा जाए तो मोदी निरंतर आगे बढ़े हैं और कभी भी उनके लिए कोई बड़ी समस्या नहीं खड़ा कर पाया। साथ ही यह भी इतना प्रबल राजयोग नहीं बना सकता जितना मोदी का है।
3. गुरु भी केंद्र में है परन्तु शत्रु स्थान पर है और वक्री भी है, अतः यहां गुरु से भी किसी प्रकार का राजयोग नहीं बन पा रहा है।
4. बुध एकादश भाव में कन्या राशि में है परन्तु वक्री है, अतः बुधादित्य योग उतना प्रभावकारी नहीं दिखाई दे रहा है।।
5. पंचम में राहु विद्या में बाधक है और उस पर सूर्य-बुध-केतु की दृष्टि से व्यक्ति बहुत नकारात्मक बुद्धि वाला या विध्वंसक विचार का हो जाएगा, अतः यहां यह योग भी समझ से परे है। क्योंकि मोदी इस तरह के व्यक्तित्व के स्वामी नहीं है।
6. सन 1985 से लेकर 2005 तक मोदी की शुक्र की महादशा रही थी  और जब अक्टूबर 2001 में मोदी मुख्यमंत्री बने तो शुक्र में शनि का अंतर था, वृश्चिक लग्न में शुक्र मारकेश है और बुध एवं शनि सहायक, इस गणना के अनुसार उस समय मुख्यमंत्री कैसे बन सकते थे मोदी?

इन सभी कारणों को देखते हुए हमने उनकी इस जन्मकुंडली को वास्तविक माना है जिसमें जन्मतिथि 17 सितंबर 1949 ,जन्म समय सुबह 11.55, जन्मस्थान वडनगर ,गुजरात है।

Dharam Quiz App के जरिये धार्मिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए एक और प्रयास

क्या कहती है 17 सितंबर 1949 की जन्म कुंडली

इस जन्म कुंडली के आधार पर जब हमने विश्लेषण किया तो चौंकाने वाले नतीजे प्राप्त हुए जो इस प्रकार है….

लग्न तुला है और तुला में ही शुक्र बैठा है – यह अपने आपमें जबरदस्त राजयोग कारक है और व्यक्ति को कीचड में पैदा होने के बावजूद राजसिंहासन तक पहुंचाने की क्षमता रखता है और यह बात जो भी ज्योतिष जानते हैं उन्हें बताने की आवश्यकता नहीं कि लग्न में तुला के शुक्र का क्या मतलब होता है।

दशम भाव में नीच का मंगल – जिसके कारण पिता के सुख में कमी परन्तु उच्च दृष्टि मां के स्थान पर अतः मां की आयु लंबी होना तय है। भरपूर आशीर्वाद, साथ ही शत्रुओं को परास्त करने की अद्भुत क्षमता के योग स्पष्ट दिख रहे हैं।

पराक्रम भाव अर्थात तृतीय भाव में अपनी ही राशि पर बैठा वक्री गुरु है। यह भाई-बहनों के सुख को कमजोर करता है परन्तु अदभुत पराक्रम देता है, मोदी के बारे में यह दोनों ही बातें सर्वविदित हैं।

राज्येश चन्द्रमा का भाग्य स्थान अर्थात नवम भाव में बैठना एक अद्भुत राजयोग है। साथ ही गुरु और चन्द्रमा का दृष्टि योग जबरदस्त पराक्रम, राज क्षमता, सृजनात्मक विचार इन सबसे व्यक्ति को ओतप्रोत बनता है, और यह सभी गुण मोदी में विद्यमान हैं।

एकादश भाव में शनि – यहां बैठकर शनि लग्न, पंचम, और अष्टम भाव को सीधे देख रहे हैं, अतः देर से विद्या की प्राप्ति, लग्न पर उच्च दृष्टि के कारण निरोगी एवं आध्यात्मिक विचारधारा, दुखी लोगों के प्रति सेवा का भाव सभी गुण प्रदान कर रहा है। साथ ही जीवन में अत्यधिक यात्रा और यात्रा व सेवा के द्वारा लाभ को दर्शाता है, और इन सभी बातों को मोदी के सन्दर्भ में बताने की आवश्यकता नहीं।

छठवें भाव में राहु – कम से कम किसी ज्योतिष के विद्वान को इसका अर्थ बताने की आवश्यकता नहीं, शत्रुओं पर जबरदस्त प्रभाव, जिसने भी शत्रुता की वह टिक नहीं सका और यही आचार्य राजेश कुमार ने पहले भी लिखा कि संजय जोशी, केशुभाई पटेल, और शंकर सिंह बाघेला आज नेपथ्य में चले गए हैं और पूरी तरह से मोदी पर आश्रित हैं। नीतीश, मायावती, मुलायम, अरविन्द केजरीवाल, मणिशंकर अय्यर, सलमान खुर्शीद जैसे न जाने कितने लोग मोदी का विरोध करने की वजह से मोदी जी से परास्त हुए।

द्वादश भाव में केतु, सूर्य, और बुध – जो स्वयं कन्या यानी कि बुध की अपनी राशि में हैं एक साथ युति कर रहे हैं। ऐसा किसी भी व्यक्ति को जबरदस्त योजनाकार, भ्रमणशील, प्रखर वक्ता, धर्म रक्षक, तथा परोपकारी बनाता है। साथ ही यह योग पुनः किसी भी शत्रु के लिए अत्यंत घातक है। सूर्य शून्य अंश का और पिता का कारक और ग्रहण योग में होने के कारण पिता के सुख में कमी और पैतृक सम्पत्ति तथा पैतृक स्थान के सुख में भारी कमी को दर्शाता है।
Watch this video :-

वर्तमान समय एवं आने वाला समय मोदी जी और बीजेपी के लिए कैसा रहेगा

लग्नेश शुक्र मे तृतीयेश एवं खष्टेश गुरु की अंतर्दशा यह इशारा करती है की इस बार भी बीजेपी यदि  मोदी के नाम पर चुनाव प्रचार मे उतरती है तो उसे फायदा होगा  किन्तु विवादों से भरा समय होगा । मोदी की इस कुंडली के हिसाब से इस बार फिर मोदी ही बीजेपी के नेता चुने जाएंगे। एक विशेष बात , मोदी जी को स्वयं तथा अपनी माता जी एवं बड़े भाई के स्वस्थ्य के प्रति सचेत रहना पड़ेगा।
मोदी जी यदि जीवन के हर उतार-चढ़ाव मे समंजस्यता चाहते हैं तो हीरा एवं पन्ना तत्काल धरण करें ।

आचार्य राजेश कुमार (दिव्यांश ज्योतिष केंद्र लखनऊ)


navdurga-sadhana.jpg

March 27, 20191min11100

मां आदिशक्ति की आराधना के लिए स्मरण करें : तांत्रिक (Tantrik) विद्याओं से मुक्ति पाने का चमत्कारी सरल मंत्र

देवी भागवत के मतानुसार पृथ्वी पर जब असुरी शक्तियों का अत्याचार बढ़ने लगा, तब मां आदिशक्ति देवताओं और मानवता की रक्षा के लिए प्रकट हुई और धरती को असुरों के आतंक से मुक्त करने का संकल्प लिया।

राजसत्ता चाहने वाले करते है यहां गुप्त पूजा

पंडित भवानी शंकर वैदिक के अनुसार तांत्रिक विद्याओं से मुक्ति पाने के लिए इस मंत्र से मां आदिशक्ति की आराधना की जानी चाहिए, ताकि हम अपनी एवं अपने परिवार की रक्षा कर सकें।

मां आदिशक्ति को प्रसन्न करने की वंदना

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते।।

 

क्या आपकी जन्म कुंडली में है दुर्घटना योग, जानिए बचने के भी उपाय



About us

AMSG MEDIA INFOLINE is a knowledge centric organization, hosting one of its kinds of website “dharam.tv” we are providing premium online information services in field of Religious, Ritual, Spirituality, Festivals & Cultural Activities, Astrologers, Guru, Pandit and related information’s in line. Our motto is for spreading knowledge that is useful to everyone.


CONTACT US

CALL US ANYTIME