केदारनाथ धाम के कपाट खुले- चारधाम यात्रा शुरू -Dharam.Tv

April 30, 20182min2270

भोले बाबा के जयकारों के साथ द्वादश ज्योतिर्लिगों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट रविवार सुबह खोल दिए गए . इसके साथ ही चारधाम यात्रा आज से शुरू हो गई. वर्ष 2013 की आपदा के बाद इस बार पहला मौका है जब कपाट खुलने के दौरान साढ़े छह हजार से अधिक श्रद्धालु कपाट खुलने के दौरान मौजूद रहे.

राज्यपाल के.के पॉल ने किए बाबा के दर्शन

सबसे पहले राज्यपाल केके पॉल और विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल ने बाबा केदारनाथ के दर्शन किए. इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए कपाट खोले गए.  कपाट खुलते ही मंदिर में दर्शन कार्यक्रम शुरू हो गया. जिला प्रशासन, मंदिर समिति के पदाधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर के दक्षिणी गेट की सील खोली गई फिर रावल, मुख्य पुजारी मंदिर समिति के कर्मचारियों और हकहकूकधारियों के मंदिर में प्रवेश के बाद गर्भगृह पर लगी सील खोली गई. इसके बाद मुख्य द्वार भी खोला गया.

इस बीच शनिवार को बाबा केदार के जयकारों के साथ डोली केदारनाथ धाम पहुंची. इस बार केदारनाथ यात्र को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है . केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया रविवार सुबह चार बजे से शुरू हो गई थी. इसके बाद पुजारियों ने मंदिर अंदर गए और धार्मिक अनुष्ठान शुरू किया. गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रुद्राभिषेक, जलाभिषेक समेत सभी धार्मिक अनुष्ठान विविधत संपन्न कराने के बाद ठीक सवा छह बजे मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए.

 

शीतकाल में यहां होती है बाबा की पूजा

ध्यान रहे कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ के कपाट छह महीने बंद रहते हैं और छह महीने के लिए खोले जाते हैं. शीतकाल में केदार की पूजा उनके शीतकालीन गद्दी स्थल उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में होती है. केदारनाथ पर्वतराज हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर अवस्थित है. केदारनाथ धाम और मंदिर तीन तरफ पहाड़ों से घिरा है. एक तरफ है करीब 22 हजार फुट ऊंचा केदारनाथ, दूसरी तरफ है 21 हजार 600 फुट ऊंचा खर्चकुंड और तीसरी तरफ है 22 हजार 700 फुट ऊंचा भरतकुंड. न सिर्फ तीन पहाड़ बल्कि पांचनदियों का संगम भी है

यहांमं‍दाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी. इन नदियों में से कुछ का अब अस्तित्व नहीं रहा लेकिन अलकनंदा की सहायक मंदाकिनी आज भी मौजूद है. इसी के किनारे है केदारेश्वर धाम. यहां सर्दियों में भारी बर्फ और बारिश में जबरदस्त पानी रहता है. समुद्रतल से 3584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां पहुंचना सबसे कठिन है.

केदारनाथ धाम का परिचय

यह उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मंदिर है, जो कटवां पत्थरों के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है. ये शिलाखंड भूरे रंग के हैं. मंदिर लगभग 6 फुट ऊंचे चबूतरे पर बना है. इसका गर्भगृह अपेक्षाकृत प्राचीन है जिसे 80वीं शताब्दी के लगभग का माना जाता है.

मंदिर के गर्भगृह में अर्धा के पास चारों कोनों पर चार सुदृढ़ पाषाण स्तंभ हैं, जहां से होकर प्रदक्षिणा होती है. अर्धा, जो चौकोर है, अंदर से पोली है और अपेक्षाकृत नवीन बनी है. सभामंडप विशाल एवं भव्य है. उसकी छत चार विशाल पाषाण स्तंभों पर टिकी है. विशालकाय छत एक ही पत्थर की बनी है. गवाक्षों में आठ पुरुष प्रमाण मूर्तियां हैं, जो अत्यंत कलात्मक हैं.

कैसे जाएं केदारनाथ

समुद्र तल से 3,581 मी. की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ जाने के लिए ऋषिकेश से 207 किमी तक वाहन से गौरीकुंड तक जाना पड़ता है तथा वहां से लगभग 19 किमी की पैदल यात्रा करनी पड़ती है. ( एजेंसी )





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