बुद्ध पूर्णिमा 2018- पूर्व जन्म के पापों से मुक्ति के दिन विशेष संयोग भी

April 29, 20182min4440

बुद्ध पूर्णिमा 30 अप्रैल 2018, सोमवार को मनाई जाएगी.  तीन साल बाद वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन सिद्धि योग भी बन रहा है. हिंदू पंचांग में इस योग को बहुत ही शुभ माना जाता है.वैशाख पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति को पाप कर्मों से छुटकारा मिलता है। शुभ मुहूर्त में पूजन करने से बिगड़े काम बन जाते हैं।

शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की पूजा करने से चारो तरफ से सुखसमृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है। सिद्धि योग और सोमवार के चलते यह तिथि बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। पूर्णिमा पर ज्योतिष में कुछ बताए गए हैं जिसको करने से जीवन में तमाम तरह की परेशानियों का अंत हो जाता है। चंद्रमा को सफेद रंग और शीतलता का प्रतीक माना गया है इसलिए इस योग में दूध और शहद के उपाय से धन, मानसम्मान में बढ़ोत्तरी होती है।

ध्यान रहे कि यह गौतम बुद्ध का 2580 वां जन्मदिन है. इस दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था. इसी दिन बोधगया में पीपल के वृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी और वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध ने गोरखपुर से 50 किलोमीटर दूर स्थित कुशीनगर में महानिर्वाण की ओर प्रस्थान किया था. दुनियाभर के बौद्ध गौतम बुद्ध की जयंती को धूमधाम से मनाते हैं.

बुद्ध पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 

बुद्ध पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 29 अप्रैल 2018 को सुबह 6:37 बजे से शुरू होकर 30 अप्रैल 2018 को 6:27 बजे खत्म होगा. हिंदू धर्म में हर त्योहार उदया तिथि को ही मनाया जाता है, इसलिए बुद्ध पूर्णिमा भी 30 अप्रैल, सोमवार को मनायी जाएगी.

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व 

बुद्ध पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से व्यक्ति के पिछले कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है.  यह स्नान लाभ की दृष्टि से अंतिम पर्व माना जाता है. बुद्ध पूर्णिमा पर बौद्ध मतावलंबी बौद्ध विहारों और मठों में इकट्ठा होकर एक साथ उपासना करते हैं. दीप जलाते है. रंगीन पताकाओं से सजावट की जाती है और बुद्ध की शिक्षाओं का अनुसरण करने का संकल्प लेते हैं. इस दिन भक्त भगवान महावीर पर फूल चढ़ाते हैं, अगरबत्ती और मोमबत्तियां जलाते हैं तथा भगवान बुद्ध के पैर छूकर शांति के लिए प्रार्थना करते हैं. 

विदेशों में भी मनायी जाती है बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों में भी पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। श्रीलंका, कंबोडिया, वियतनाम, चीन, नेपाल थाईलैंड, मलयेशिया, म्यांमार, इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं। श्रीलंका में इस दिन कोवेसाकके नाम से जाना जाता है, जो निश्चित रूप से वैशाख का ही अपभ्रंश है.

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महात्मा बुद्ध का ज्ञान 

महात्मा बुद्ध ने हमेशा मनुष्य को भविष्य की चिंता से निकलकर वर्तमान में खड़े रहने की शिक्षा दी. उन्होंने दुनिया को बताया आप अभी अपनी जिंदगी को जिएं, भविष्य के बारे में सोचकर समय बर्बाद ना करें. बिहार के बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई और उनके ज्ञान की रौशनी पूरी दुनिया में फैली. महात्मा बुद्ध का एक मूल सवाल है. जीवन का सत्य क्या है? भविष्य को हम जानते नहीं है. अतीत पर या तो हम गर्व करते हैं या उसे याद करके पछताते हैं. भविष्य की चिंता में डूबे रहते हैं. दोनों दुखदायी हैं.

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धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, महात्मा बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है. इस दिन लोग व्रतउपवास करते हैं। बौद्ध धर्मावलंबी सफेद कपड़े पहनते हैं और बौद्ध विहारों और मठों में सामूहिक उपासना करते है. दान देते हैं. बौद्ध और हिंदू दोनों ही धर्मों के लोग बुद्ध पूर्णिमा को बहुत श्रद्धा के साथ मनाते हैं. बुद्ध पूर्णिमा का पर्व बुद्ध के आदर्शों और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.

 




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