गायत्री मंत्र के जप से मिलते हैं ये फ़ायदे….

May 26, 20171min13010

गायत्री शब्द दो शब्दों से बना है: “गायत ” का मतलब पाप है और “त्रि” का मतलब है मुक्ति इस प्रकार गायत्री का अर्थ है “पाप से मुक्ति”| गायत्री देवी ने “गायत्री मंत्र” देकर सम्पूर्ण मानव जाति को आशीर्वाद दिया| यह “गुरु मंत्र” या “सावित्री मंत्र” के रूप में भी जाना जाता है| गायत्री मंत्र का अभ्यास सभी वेदों का सार है| देवी गायत्री को “वेद-माता” या वेदों की माँ कहा जाता है| गायत्री देवी, जो पंचमुख़ी है, हमारी पांच इंद्रियों और प्राणों की देवी मानी जाती है| भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव भी इस मंत्र का जाप करते थे| गायत्री मंत्र देवताओं का खाना होने के लिए कहा जाता है। यह मंत्र है अज्ञानी (मिटा देने वाले) इंसान को मूल प्रकृति के इंसान में बदल देने के लिए| अज्ञान रुपी अन्धकार की वजह से आत्मा परमात्मा से नहीं मिल पाती और अपनी पहचान खो देती है| जब अज्ञान समाप्त हो चूका होगा, हम अपने मूल प्रकृति के स्वभाव को फिर से शुरू करने में सक्षम होंगे| गायत्री मंत्र “प्रकाश और जीवन के दाता” की प्रार्थना के रूपI में भी माना जाता है|
“ॐ भूर्भुवः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्”
गायत्री मंत्र का सार संक्षेप में:
गायत्री मंत्र (वेद ग्रंथ की माता) को हिन्दू धर्म में सबसे उत्तम मंत्र माना जाता है. यह मंत्र हमें ज्ञान प्रदान करता है. इस मंत्र का मतलब है – हे प्रभु, क्रिपा करके हमारी बुद्धि को उजाला प्रदान कीजिये और हमें धर्म का सही रास्ता दिखाईये. यह मंत्र सूर्य देवता (सवितुर) के लिये प्रार्थना रूप से भी माना जाता है.
हे प्रभु! आप हमारे जीवन के दाता हैं आप हमारे दुख़ और दर्द का निवारण करने वाले हैं आप हमें सुख़ और शांति प्रदान करने वाले हैं|
“गायत्री मंत्र” का वैज्ञानिक महत्त्व
“गायत्री मंत्र” दुनिया का सबसे शक्तिशाली भजन है: डॉक्टर होवार्ड स्टेनग्रेल
एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने दुनिया भर से मंत्र, भजन और इनवोकेशन एकत्र किये और उसने उन सभी मंत्र, भजन और इनवोकेशन की ताकत का परीक्षण अपनी शरीर विज्ञान प्रयोगशाला में किया और पाया कि, ‘गायत्री मंत्र’ में १ १०,००० प्रति मिनट ध्वनि तरंगों का उत्पादन होता है जो कि यह और सभी मन्त्रों, भजनों में सबसे बहुत ज्यादा था| ध्वनि या एक विशेष आवृत्ति की ध्वनि तरंगों के संयोजन के माध्यम से, इस मंत्र ने विशिष्ट आध्यात्मिक योग्यता विकसित करने में सक्षम होने का दावा किया। और अब वैज्ञानिकों के अनुसार भी यह दुनिया में सबसे शक्तिशाली मंत्र माना जाता है| हैम्बर्ग विश्वविद्यालय ने ‘गायत्री मंत्र’ को सृष्टि के मानसिक और शारीरिक तल दोनों पर प्रभावकारिता अनुसंधान में शुरू की.
अमेरिका और अन्य देशों में गायत्री मंत्र 07:00 से 15 मिनट के लिए रेडियो पर दैनिक प्रसारित हो रहा है | पिछले तीन साल से पारामारिबो, सूरीनाम, दक्षिण अमेरिका में और अब पिछले १ साल से एम्स्टर्म, हॉलैंड में भी प्रसारित हो रहा है।
जप से मिलते हैं ये लाभ
गायत्री मंत्र का जाप करने से उत्साह एवं सकारात्मकता से आपकी त्वचा में चमक आती है, तामसिकता से घृणा, और परमार्थ में रूचि जागती है, पूर्वाभास होने लगता है, आशीर्वाद देने की शक्ति बढ़ती है, नेत्रों में तेज आता है, स्वप्न सिद्ध हो जाते हैं, क्रोध शांत होता है, ज्ञान की वृद्धि होती है।पंडित ‘विशाल’ दयानंद शास्‍त्री बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति जीवन की समस्याओं से बहुत त्रस्त है तो उसकी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। वह पीपल, शमी, वट, गूलर, पाकर की समिधाएं लेकर एक पात्र में कच्चा दूध भरकर रख लें एवं उस दूध के सामने एक हजार गायत्री मंत्र का जाप करें। इसके बाद एक-एक समिधा को दूध में स्पर्श करा कर गायत्री मंत्र का जप करते हुए अग्रि में होम करने से समस्त परेशानियों एवं दरिद्रता से मुक्ति मिल जाती है।विद्यार्थीयों के लिए: गायत्री मंत्र का जप सभी के लिए उपयोगी है किंतु विद्यार्थियों के लिए तो यह मंत्र बहुत लाभदायक है। रोजाना इस मंत्र का एक सौ आठ बार जप करने से विद्यार्थी को सभी प्रकार की विद्या प्राप्त करने में आसानी होती है। विद्यार्थियों को पढऩे में मन नहीं लगना, याद किया हुआ भूल जाना, शीघ्रता से याद न होना आदि समस्याओं से निजात मिल जाती है।
दरिद्रता के नाश के लिए :
यदि किसी व्यक्ति के व्यापार, नौकरी में हानि हो रही है या कार्य में सफलता नहीं मिलती, आमदनी कम है तथा व्यय अधिक है तो उन्हें गायत्री मंत्र का जप काफी फायदा पहुंचाता है। शुक्रवार को पीले वस्त्र पहनकर हाथी पर विराजमान गायत्री माता का ध्यान कर गायत्री मंत्र के आगे और पीछे श्रीं सम्पुट लगाकर जप करने से दरिद्रता का नाश होता है। इसके साथ ही रविवार को व्रत किया जाए तो ज्यादा लाभ होता है।
संतान संबंधी परेशानियां दूर करने के लिए : किसी दंपत्ति को संतान प्राप्त करने में कठिनाई आ रही हो या संतान से दुखी हो अथवा संतान रोगग्रस्त हो तो प्रात: पति-पत्नी एक साथ सफेद वस्त्र धारण कर यौं बीज मंत्र का सम्पुट लगाकर गायत्री मंत्र का जप करें। संतान संबंधी किसी भी समस्या से शीघ्र मुक्ति मिलती है।

पढ़कुछ इस तरह कीजिए मां गायत्री की उपासनाशत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए :
यदि कोई व्यक्ति शत्रुओं के कारण परेशानियां झेल रहा हो तो उसे प्रतिदिन या विशेषकर मंगलवार, अमावस्या अथवा रविवार को लाल वस्त्र पहनकर माता दुर्गा का ध्यान करते हुए गायत्री मंत्र के आगे एवं पीछे क्लीं बीज मंत्र का तीन बार सम्पुट लगाकार एक सौ आठ बार जाप करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। मित्रों में सद्भाव, परिवार में एकता होती है तथा न्यायालयों आदि कार्यों में भी विजय प्राप्त होती है।
विवाह कार्य में देरी हो रही हो तो :
यदि किसी भी जातक के विवाह में अनावश्यक देरी हो रही हो तो सोमवार को सुबह के समय पीले वस्त्र धारण कर माता पार्वती का ध्यान करते हुए ह्रीं बीज मंत्र का सम्पुट लगाकर एक सौ आठ बार जाप करने से विवाह कार्य में आने वाली समस्त बाधाएं दूर होती हैं। यह साधना स्त्री पुरुष दोनों कर सकते हैं।पढ़ें : वेदों से हुई उत्पत्ति इसलिए हैं वेदमातायदि किसी रोग के कारण परेशानियां हों तो : यदि किसी रोग से परेशान है और रोग से मुक्ति जल्दी चाहते हैं तो किसी भी शुभ मुहूर्त में एक कांसे के पात्र में स्वच्छ जल भरकर रख लें एवं उसके सामने लाल आसन पर बैठकर गायत्री मंत्र के साथ ऐं ह्रीं क्लीं का संपुट लगाकर गायत्री मंत्र का जप करें। जप के पश्चात जल से भरे पात्र का सेवन करने से गंभीर से गंभीर रोग का नाश होता है। यही जल किसी अन्य रोगी को पीने देने से उसके भी रोग का नाश होता हैं।रोग निवारण के लिए: किसी भी शुभ मुहूर्त में दूध, दही, घी एवं शहद को मिलाकर एक हजार गायत्री मंत्रों के साथ हवन करने से चेचक, आंखों के रोग एवं पेट के रोग समाप्त हो जाते हैं। इसमें समिधाएं पीपल की होना चाहिए। गायत्री मंत्रों के साथ नारियल का बुरा एवं घी का हवन करने से शत्रुओं का नाश हो जाता है। नारियल के बुरे मे यदि शहद का प्रयोग किया जाए तो सौभाग्य में वृद्धि होती हैं।
गायत्री शब्द दो शब्दों से बना है: “गायत ” का मतलब पाप है और “त्रि” का मतलब है मुक्ति इस प्रकार गायत्री का अर्थ है “पाप से मुक्ति”| गायत्री देवी ने “गायत्री मंत्र” देकर सम्पूर्ण मानव जाति को आशीर्वाद दिया| यह “गुरु मंत्र” या “सावित्री मंत्र” के रूप में भी जाना जाता है| गायत्री मंत्र का अभ्यास सभी वेदों का सार है| देवी गायत्री को “वेद-माता” या वेदों की माँ कहा जाता है| गायत्री देवी, जो पंचमुख़ी है, हमारी पांच इंद्रियों और प्राणों की देवी मानी जाती है| भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव भी इस मंत्र का जाप करते थे| गायत्री मंत्र देवताओं का खाना होने के लिए कहा जाता है। यह मंत्र है अज्ञानी (मिटा देने वाले) इंसान को मूल प्रकृति के इंसान में बदल देने के लिए| अज्ञान रुपी अन्धकार की वजह से आत्मा परमात्मा से नहीं मिल पाती और अपनी पहचान खो देती है| जब अज्ञान समाप्त हो चूका होगा, हम अपने मूल प्रकृति के स्वभाव को फिर से शुरू करने में सक्षम होंगे| गायत्री मंत्र “प्रकाश और जीवन के दाता” की प्रार्थना के रूपI में भी माना जाता है|
“ॐ भूर्भुवः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्”
गायत्री मंत्र का सार संक्षेप में:
गायत्री मंत्र (वेद ग्रंथ की माता) को हिन्दू धर्म में सबसे उत्तम मंत्र माना जाता है. यह मंत्र हमें ज्ञान प्रदान करता है. इस मंत्र का मतलब है – हे प्रभु, क्रिपा करके हमारी बुद्धि को उजाला प्रदान कीजिये और हमें धर्म का सही रास्ता दिखाईये. यह मंत्र सूर्य देवता (सवितुर) के लिये प्रार्थना रूप से भी माना जाता है.
हे प्रभु! आप हमारे जीवन के दाता हैं आप हमारे दुख़ और दर्द का निवारण करने वाले हैं आप हमें सुख़ और शांति प्रदान करने वाले हैं|
“गायत्री मंत्र” का वैज्ञानिक महत्त्व
“गायत्री मंत्र” दुनिया का सबसे शक्तिशाली भजन है: डॉक्टर होवार्ड स्टेनग्रेल
एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने दुनिया भर से मंत्र, भजन और इनवोकेशन एकत्र किये और उसने उन सभी मंत्र, भजन और इनवोकेशन की ताकत का परीक्षण अपनी शरीर विज्ञान प्रयोगशाला में किया और पाया कि, ‘गायत्री मंत्र’ में १ १०,००० प्रति मिनट ध्वनि तरंगों का उत्पादन होता है जो कि यह और सभी मन्त्रों, भजनों में सबसे बहुत ज्यादा था| ध्वनि या एक विशेष आवृत्ति की ध्वनि तरंगों के संयोजन के माध्यम से, इस मंत्र ने विशिष्ट आध्यात्मिक योग्यता विकसित करने में सक्षम होने का दावा किया। और अब वैज्ञानिकों के अनुसार भी यह दुनिया में सबसे शक्तिशाली मंत्र माना जाता है| हैम्बर्ग विश्वविद्यालय ने ‘गायत्री मंत्र’ को सृष्टि के मानसिक और शारीरिक तल दोनों पर प्रभावकारिता अनुसंधान में शुरू की.
अमेरिका और अन्य देशों में गायत्री मंत्र 07:00 से 15 मिनट के लिए रेडियो पर दैनिक प्रसारित हो रहा है | पिछले तीन साल से पारामारिबो, सूरीनाम, दक्षिण अमेरिका में और अब पिछले १ साल से एम्स्टर्म, हॉलैंड में भी प्रसारित हो रहा है।
जप से मिलते हैं ये लाभ
गायत्री मंत्र का जाप करने से उत्साह एवं सकारात्मकता से आपकी त्वचा में चमक आती है, तामसिकता से घृणा, और परमार्थ में रूचि जागती है, पूर्वाभास होने लगता है, आशीर्वाद देने की शक्ति बढ़ती है, नेत्रों में तेज आता है, स्वप्न सिद्ध हो जाते हैं, क्रोध शांत होता है, ज्ञान की वृद्धि होती है।पंडित ‘विशाल’ दयानंद शास्‍त्री बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति जीवन की समस्याओं से बहुत त्रस्त है तो उसकी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। वह पीपल, शमी, वट, गूलर, पाकर की समिधाएं लेकर एक पात्र में कच्चा दूध भरकर रख लें एवं उस दूध के सामने एक हजार गायत्री मंत्र का जाप करें। इसके बाद एक-एक समिधा को दूध में स्पर्श करा कर गायत्री मंत्र का जप करते हुए अग्रि में होम करने से समस्त परेशानियों एवं दरिद्रता से मुक्ति मिल जाती है।विद्यार्थीयों के लिए: गायत्री मंत्र का जप सभी के लिए उपयोगी है किंतु विद्यार्थियों के लिए तो यह मंत्र बहुत लाभदायक है। रोजाना इस मंत्र का एक सौ आठ बार जप करने से विद्यार्थी को सभी प्रकार की विद्या प्राप्त करने में आसानी होती है। विद्यार्थियों को पढऩे में मन नहीं लगना, याद किया हुआ भूल जाना, शीघ्रता से याद न होना आदि समस्याओं से निजात मिल जाती है।
दरिद्रता के नाश के लिए :
यदि किसी व्यक्ति के व्यापार, नौकरी में हानि हो रही है या कार्य में सफलता नहीं मिलती, आमदनी कम है तथा व्यय अधिक है तो उन्हें गायत्री मंत्र का जप काफी फायदा पहुंचाता है। शुक्रवार को पीले वस्त्र पहनकर हाथी पर विराजमान गायत्री माता का ध्यान कर गायत्री मंत्र के आगे और पीछे श्रीं सम्पुट लगाकर जप करने से दरिद्रता का नाश होता है। इसके साथ ही रविवार को व्रत किया जाए तो ज्यादा लाभ होता है।
संतान संबंधी परेशानियां दूर करने के लिए : किसी दंपत्ति को संतान प्राप्त करने में कठिनाई आ रही हो या संतान से दुखी हो अथवा संतान रोगग्रस्त हो तो प्रात: पति-पत्नी एक साथ सफेद वस्त्र धारण कर यौं बीज मंत्र का सम्पुट लगाकर गायत्री मंत्र का जप करें। संतान संबंधी किसी भी समस्या से शीघ्र मुक्ति मिलती है।

पढ़कुछ इस तरह कीजिए मां गायत्री की उपासनाशत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए :
यदि कोई व्यक्ति शत्रुओं के कारण परेशानियां झेल रहा हो तो उसे प्रतिदिन या विशेषकर मंगलवार, अमावस्या अथवा रविवार को लाल वस्त्र पहनकर माता दुर्गा का ध्यान करते हुए गायत्री मंत्र के आगे एवं पीछे क्लीं बीज मंत्र का तीन बार सम्पुट लगाकार एक सौ आठ बार जाप करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। मित्रों में सद्भाव, परिवार में एकता होती है तथा न्यायालयों आदि कार्यों में भी विजय प्राप्त होती है।
विवाह कार्य में देरी हो रही हो तो :
यदि किसी भी जातक के विवाह में अनावश्यक देरी हो रही हो तो सोमवार को सुबह के समय पीले वस्त्र धारण कर माता पार्वती का ध्यान करते हुए ह्रीं बीज मंत्र का सम्पुट लगाकर एक सौ आठ बार जाप करने से विवाह कार्य में आने वाली समस्त बाधाएं दूर होती हैं। यह साधना स्त्री पुरुष दोनों कर सकते हैं।पढ़ें : वेदों से हुई उत्पत्ति इसलिए हैं वेदमातायदि किसी रोग के कारण परेशानियां हों तो : यदि किसी रोग से परेशान है और रोग से मुक्ति जल्दी चाहते हैं तो किसी भी शुभ मुहूर्त में एक कांसे के पात्र में स्वच्छ जल भरकर रख लें एवं उसके सामने लाल आसन पर बैठकर गायत्री मंत्र के साथ ऐं ह्रीं क्लीं का संपुट लगाकर गायत्री मंत्र का जप करें। जप के पश्चात जल से भरे पात्र का सेवन करने से गंभीर से गंभीर रोग का नाश होता है। यही जल किसी अन्य रोगी को पीने देने से उसके भी रोग का नाश होता हैं।रोग निवारण के लिए: किसी भी शुभ मुहूर्त में दूध, दही, घी एवं शहद को मिलाकर एक हजार गायत्री मंत्रों के साथ हवन करने से चेचक, आंखों के रोग एवं पेट के रोग समाप्त हो जाते हैं। इसमें समिधाएं पीपल की होना चाहिए। गायत्री मंत्रों के साथ नारियल का बुरा एवं घी का हवन करने से शत्रुओं का नाश हो जाता है। नारियल के बुरे मे यदि शहद का प्रयोग किया जाए तो सौभाग्य में वृद्धि होती हैं।




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